उत्तराखंड स्थापना दिवस पर राज्य आंदोलनकारियों को धामी सरकार की ओर से बड़ी सौगात मिल सकती है। सरकार नियुक्तियों में आ रही कानूनी अड़चन दूर करने, दोहरी पेंशन और चिह्नीकरण से जुड़े मामलों के समाधान पर विचार कर रही है।
राज्य आंदोलनकारियों के शेष मामलों के निपटारे के लिए 2 मंत्रियों की उपसमिति गठित करने की तैयारी है। हालांकि, अभी इसके गठन और किसी अंतिम फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नियुक्तियों का मामला
राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ देते हुए पहले विभिन्न विभागों में नियुक्तियां दी गई थीं। वर्ष 2013-14 से जुड़े मामले में न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब सरकार इस कानूनी और प्रशासनिक अड़चन का रास्ता निकालने की दिशा में कदम उठा सकती है।
दोहरी पेंशन पर भी विचार
राज्य आंदोलन में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। मौजूदा व्यवस्था के तहत अन्य पेंशन मिलने के कारण महिलाओं और पूर्व सैनिकों को राज्य आंदोलनकारी पेंशन नहीं मिल रही है। सरकार इस रोक को हटाने पर विचार कर सकती है।
ऐसा होने पर उन आंदोलनकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अन्य पेंशन के साथ राज्य आंदोलनकारी पेंशन लेने के पात्र हैं। इस मामले का समाधान लंबे समय से लंबित है और आंदोलनकारी संगठन लगातार इसकी मांग उठाते रहे हैं।
चिह्नीकरण के नियमों में छूट का प्रस्ताव
राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण का मुद्दा भी सरकार के एजेंडे में शामिल है। इसके लिए मौजूदा मानकों में छूट देने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
प्रस्ताव के तहत समाचार पत्रों में प्रकाशित आंदोलन से जुड़ी खबरों और उपलब्ध दस्तावेजों को चिह्नीकरण का आधार बनाया जा सकता है। इससे समाचार पत्रों में आंदोलनकारी के रूप में नाम प्रकाशित होने वाले लोगों के लिए चिह्नीकरण का रास्ता खुल सकता है।
नाम प्रकाशित होने के साथ जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय कमेटी की संस्तुति को भी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है।
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने कहा, “राज्य आंदोलनकारियों के शेष बचे मसलों के निपटारे लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात हुई। जिस पर सीएम का सकारात्मक आश्वासन मिला है। राज्य स्थापना दिवस पर सरकार की ओर से कुछ सौगात मिल सकती है।”
इससे संकेत मिलता है कि स्थापना दिवस पर सरकार लंबित मामलों को लेकर कोई घोषणा कर सकती है। फिलहाल नियुक्तियों, पेंशन और चिह्नीकरण से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।
निष्कर्ष
सरकार राज्य आंदोलनकारियों की नियुक्तियों, दोहरी पेंशन और चिह्नीकरण से जुड़े मामलों पर समाधान की तैयारी कर रही है। स्थापना दिवस पर संभावित घोषणा के बावजूद उपसमिति, नियमों में छूट और पेंशन संबंधी फैसलों पर अंतिम आदेश अभी सामने नहीं आया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. राज्य आंदोलनकारियों को स्थापना दिवस पर क्या मिल सकता है?
सरकार की ओर से नियुक्तियों, दोहरी पेंशन और चिह्नीकरण से जुड़े मामलों पर राहत की घोषणा हो सकती है।
Q. नियुक्तियों से जुड़ी मुख्य अड़चन क्या है?
वर्ष 2013-14 से जुड़े मामले में न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
Q. नियुक्तियों की अड़चन दूर करने के लिए क्या तैयारी है?
सरकार 2 मंत्रियों की उपसमिति गठित करने की तैयारी कर रही है।
Q. दोहरी पेंशन का मामला किन लोगों से जुड़ा है?
अन्य पेंशन पाने वाली महिलाओं और पूर्व सैनिकों को राज्य आंदोलनकारी पेंशन नहीं मिल रही है।
Q. चिह्नीकरण के लिए किन आधारों पर विचार हो रहा है?
समाचार पत्रों में प्रकाशित आंदोलन संबंधी खबरों, उपलब्ध दस्तावेजों और 10 सदस्यीय कमेटी की संस्तुति को आधार बनाने पर विचार है।










