एम्स के सेटेलाइट सेंटर किच्छा में नियुक्ति के नाम पर कथित धोखाधड़ी की जांच अब आउटसोर्स एजेंसी राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक और शिवा सिंह की भूमिका पर केंद्रित है। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में एजेंसी मैनेजर समेत 2 लोगों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

मामले में गिरफ्तार आरोपी दीपक गुसाईं से पूछताछ के दौरान नौकरी दिलाने के नाम पर अलग-अलग लोगों से रकम लेने की जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार, दीपक ने इसमें से 2,40,000 रूपये शिवा सिंह को देने की बात कही है।

दूसरे आरोपी सुब्रत बछाड़ ने भी अपने और अन्य लोगों की नौकरी के लिए पैसे देने की बात बताई। उसके अनुसार, संबंधित लोगों की मुलाकात शिवा सिंह और राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक से कराई गई थी। इन बयानों के बाद जांच का दायरा आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोगों पर और बढ़ गया है।

नियुक्ति पत्रों पर एजेंसी की मोहर का दावा

पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों के पास मिले नियुक्ति पत्रों पर राजदीप इंटरप्राइजेज की मोहर बताई जा रही थी। एक महिला कर्मचारी के पुलिस को दिए बयान में कथित तौर पर कहा गया कि प्रमाण पत्रों पर कंपनी की मोहर लगाई गई थी।

कर्मचारी ने यह भी बताया कि मोहर लगाने के लिए कंपनी के किसी प्रभावशाली व्यक्ति की ओर से निर्देश दिए गए थे। पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस बयान को जांच के दौरान सामने आया आरोप माना जा रहा है, प्रमाणित तथ्य नहीं।

एम्स से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच

पुलिस के मुताबिक, शिवा सिंह पहले आउटसोर्स एजेंसी के जरिये एम्स में काम कर चुका है। वहीं दीपक गुसाईं फिलहाल एम्स की आयुष्मान योजना में आउटसोर्स माध्यम से तैनात है। विनायक राजदीप इंटरप्राइजेज में मैनेजर है।

तीनों का आउटसोर्स एजेंसी या एम्स से जुड़ाव सामने आने के बाद पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया में अंदरूनी स्तर पर किसी की भूमिका थी या नहीं। यह आशंका भी जांच का हिस्सा है कि कुछ नियुक्तियां केवल कागजों पर फर्जी नहीं थीं, बल्कि रकम लेकर वास्तविक तौर पर कराई जा रही थीं।

पुलिस अभी इस बात की पुष्टि नहीं कर पाई है कि एम्स का कोई प्रभावशाली व्यक्ति इस कथित नेटवर्क में शामिल था। इसलिए इस संभावना को फिलहाल जांच का विषय ही माना जा रहा है।

पहले उठे सवालों के बीच आगे की पड़ताल

मामला सामने आने के बाद आउटसोर्स एजेंसी के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। पुलिस अब आरोपियों के बयानों, नियुक्ति पत्रों, मोहर के इस्तेमाल और पैसों के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की कड़ियां जोड़ रही है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नौकरी चाहने वाले लोगों को किस प्रक्रिया से एजेंसी के अधिकारियों या उससे जुड़े व्यक्तियों तक पहुंचाया गया। उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस की कार्रवाई अभी आरोपों और बयानों की पड़ताल के चरण में है।

निष्कर्ष

किच्छा सेटेलाइट सेंटर भर्ती मामले में जांच का मुख्य केंद्र अब राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक और शिवा सिंह हैं। पुलिस नियुक्ति पत्रों, रकम के लेनदेन और एम्स से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. यह मामला किस जगह की नियुक्तियों से जुड़ा है?

यह मामला एम्स के सेटेलाइट सेंटर किच्छा में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है।

Q. पुलिस की जांच किन लोगों पर केंद्रित है?

जांच राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक और शिवा सिंह की भूमिका पर केंद्रित है। पुलिस की शुरुआती जांच में एजेंसी मैनेजर समेत 2 लोगों की भूमिका अहम मानी गई है।

Q. दीपक गुसाईं ने पूछताछ में क्या बताया?

पुलिस के अनुसार, दीपक गुसाईं ने नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रकम लेने की बात बताई। उसने 2,40,000 रूपये शिवा सिंह को देने की जानकारी भी दी।

Q. सुब्रत बछाड़ का बयान क्या है?

सुब्रत बछाड़ ने अपने और अन्य लोगों की नौकरी के लिए रकम देने की बात कही। उसने संबंधित लोगों की मुलाकात शिवा सिंह और विनायक से कराने की जानकारी दी।

Q. क्या नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की मोहर की पुष्टि हो चुकी है?

नियुक्ति पत्रों पर राजदीप इंटरप्राइजेज की मोहर होने की बात सामने आई है। पुलिस ने मोहर लगाने के निर्देश से जुड़े दावे की पुष्टि नहीं की है।

Q. क्या एम्स के किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका साबित हुई है?

नहीं। किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका अभी साबित नहीं हुई है और यह पुलिस की जांच का हिस्सा है।