नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत कृषि विज्ञान केंद्र टिहरी गढ़वाल ने ग्राम बडेडा में एक दिन का पोषण शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम किया। इसमें महिलाओं, बच्चों और किशोर-किशोरियों समेत कुल 48 लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को संतुलित और अलग

कार्यक्रम में डा. कीर्ति कुमारी ने राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प में पोषण की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वस्थ और अच्छी तरह से पोषित नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं। कुपोषण का असर सिर्फ सेहत तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास, शिक्षा और काम करने की क्षमता पर भी असर डालता है।

उन्होंने परिवार के हर सदस्य, खासकर बच्चों और किशोरियों के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार सुनिश्चित करने पर जोर दिया। डा. कुमारी ने रोज के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल-सब्जियां, स्थानीय दालें और मोटे अनाज (मिलेट्स) शामिल करने की अपील की। साथ ही उत्तराखंड के पारंपरिक और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी भोजन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

बच्चों और किशोरों को जंक फूड, ज्यादा तले-भुने और पैकेट वाले खाने के सामान, साथ ही ज्यादा मीठे पेय पदार्थों से बचने की सलाह दी गई। वंदना कुमारी ने साफ-सफाई और सेहत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने व्यक्तिगत और घरेलू साफ-सफाई, सही तरीके से हाथ धोने, साफ पानी पीने और सुरक्षित भोजन के महत्व को बताया।

वंदना कुमारी ने गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती दो सालों तक के पहले 1000 स्वर्णिम दिनों को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए बहुत जरूरी बताया। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों से बातचीत कर उनके रोज के खान-पान और पोषण संबंधी आदतों पर चर्चा हुई। परिवार के भोजन को स्थानीय खाद्य संसाधनों का उपयोग करके और पौष्टिक बनाने के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए। महिलाओं और किशोरियों को अपनी सेहत और पोषण को प्राथमिकता देने के साथ बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदत डालने के लिए प्रेरित किया गया।