मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। उन्होंने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सैनिकों से आत्मीयता से संवाद किया और देश की रक्षा में उनके साहस, शौर्य तथा समर्पण के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसी अनुभूति हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों की असली खुशी अपनों के बीच होती है और सैनिक उनके लिए परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जवान पर्व के समय अपने घर-परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा करते हैं। जब देशवासी परिवारों के साथ दीपावली मनाते हैं, तब सैनिक सीमाओं पर मुस्तैद रहकर उनकी सुरक्षा और खुशियों की जिम्मेदारी निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
जसवंत सिंह रावत के शौर्य को याद किया
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। इनमें महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत का अदम्य साहस और बलिदान भी शामिल था। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर जसवंत सिंह रावत का पराक्रम भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवशाली अध्याय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं। उन्होंने इस अवसर को गर्व के साथ भावुक कर देने वाला बताया। मुख्यमंत्री ने जसवंत सिंह रावत सहित मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को नमन किया।
उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्रता के बाद हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक रेजीमेंट के जवानों ने वीरता तथा कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है।
शहीद परिवारों के लिए राज्य सरकार के फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान तथा कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की गई है।
उन्होंने कहा कि शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में सेवायोजित करने की व्यवस्था के तहत अनेक आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई है। इस व्यवस्था के लिए आवेदन की समय-सीमा भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का काम लगभग पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, सैन्यधाम देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनन्द स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आर.एस. थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, लेफ्टिनेंट कर्नल एस.एस. सिद्दीकी, मेजर के.डी. सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भण्डारी समेत सैन्य अधिकारी तथा जवान मौजूद रहे।
निष्कर्ष
देहरादून के दीपावली मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने जवानों के साथ पर्व मनाकर सैनिकों के त्याग को सम्मान दिया। उन्होंने शहीद परिवारों की मदद, आश्रितों को सरकारी नौकरी और सैन्यधाम के निर्माण से जुड़े राज्य सरकार के कदमों की जानकारी भी दी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. दीपावली मिलन कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
कार्यक्रम देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित हुआ।
Q. मुख्यमंत्री ने जवानों के लिए क्या किया?
मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
Q. शहीद सैनिकों के आश्रितों की अनुग्रह राशि कितनी की गई है?
राज्य सरकार ने यह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की है।
Q. शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी से जुड़ी क्या व्यवस्था है?
शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में सेवायोजित करने की व्यवस्था है। इसके तहत अनेक आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई है।
Q. सरकारी नौकरी के लिए आवेदन की समय-सीमा में क्या बदलाव हुआ है?
आवेदन की समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष की गई है।
Q. सैन्यधाम की प्रगति के बारे में मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का काम लगभग पूरा हो चुका है।
Q. मुख्यमंत्री ने किस वीर सैनिक का उल्लेख किया?
उन्होंने महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत के शौर्य और बलिदान का उल्लेख किया।










