उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 23 साल पुराना जेनी केस फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा ने इसे अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस के हमलों के जवाब में उठाया था। अब जेनी के खुद सामने आने से मामला केवल नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा।
7 नवंबर को जेनी देहरादून पहुंचीं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। उन्होंने मामले में दोबारा सीबीआई जांच और अपने बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। जेनी ने डीजीपी को शिकायत भी दी।
हरक सिंह रावत ने इन आरोपों के बाद कहा कि मामले की सीबीआई और डीएनए जांच पहले हो चुकी है। उनके अनुसार अदालत का फैसला भी आ चुका है और जांच रिपोर्ट को न्यायालय ने मंजूरी दी थी। उन्होंने भाजपा पर अंकिता भंडारी हत्याकांड से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और अपनी छवि खराब करने वालों के खिलाफ अदालत जाने की बात कही।
अंकिता मामले से कैसे जुड़ी राजनीतिक बहस
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस 22 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी उत्तराखंड न्याय यात्रा निकाल रही है। यात्रा के दौरान अंकिता को न्याय, महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को मुद्दा बनाया गया। गढ़वाल, कुमाऊं, देहरादून और हरिद्वार में 4 अलग-अलग दलों के माध्यम से जनसंपर्क किया गया।
हरिद्वार में इस यात्रा की कमान हरक सिंह रावत के पास थी। 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस की न्याय यात्रा पर पलटवार करते हुए अंकिता मामले में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। इसके बाद भाजपा ने जेनी केस को सार्वजनिक बहस में प्रमुखता से उठाना शुरू किया।
1 नवंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने जेनी के बच्चे के पिता की पहचान सार्वजनिक करने का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह मामला कांग्रेस शासनकाल का है और उस समय जेनी ने हरक सिंह रावत का नाम लिया था।
इसके जवाब में हरक सिंह रावत ने भट्ट के डीएनए टेस्ट की बात कही। 5 नवंबर को महेंद्र भट्ट ने भी डीएनए जांच के लिए तैयार होने की बात कही और हरक सिंह रावत से दोबारा जांच के लिए आगे आने को कहा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हरक का बचाव करते हुए कहा कि वह सीबीआई कोर्ट से बरी हो चुके हैं। उन्होंने भट्ट के खिलाफ मानहानि का दावा करने की बात भी कही।
2003 में क्या हुआ था
जेनी केस 2003 में तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के दौरान सामने आया था। उस समय हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। 15 जून 2003 को जेनी ने देहरादून के सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया और तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताया।
18 जून को यह मामला उत्तरांचल विधानसभा में उठा। उस समय विपक्ष में रही भाजपा ने इसे जोरदार तरीके से उठाया। विवाद बढ़ने के बाद हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की।
12 जुलाई 2003 को सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की। 25 जुलाई 2003 को जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान डीएनए नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद हरक सिंह रावत को राहत मिली।
चुनाव से पहले बदली राजनीतिक स्थिति
2003 में भाजपा विपक्ष में थी और कांग्रेस सत्ता में। उस समय भाजपा ने जेनी केस को कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बनाया था। 2026 में स्थिति बदल चुकी है। भाजपा सत्ता में है, जबकि कांग्रेस विपक्ष में है। इसी वजह से पुराने मामले की राजनीतिक अहमियत फिर बढ़ गई है।
हरक सिंह रावत फिलहाल कांग्रेस में हैं और पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह जिम्मेदारी उन्हें कांग्रेस की रणनीति और चुनावी तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका देती है। भाजपा के लिए भी अब सवाल यह है कि जेनी की शिकायत को राजनीतिक बहस से अलग रखकर मामले में निष्पक्ष जांच की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
जेनी के आरोपों और दोबारा जांच की मांग ने 2003 के मामले को 2027 चुनाव से पहले फिर जीवित राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। भाजपा इसे कांग्रेस पर हमला करने के लिए उठा रही है, जबकि हरक सिंह रावत पुराने सीबीआई और डीएनए जांच का हवाला देकर आरोपों को खारिज कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. जेनी केस फिर चर्चा में क्यों आया?
7 नवंबर को जेनी ने देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए और दोबारा सीबीआई जांच की मांग की।
Q. जेनी ने क्या मांग की है?
जेनी ने मामले की दोबारा सीबीआई जांच और अपने बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। उन्होंने डीजीपी को शिकायत भी दी।
Q. भाजपा ने यह मामला कब उठाया?
भाजपा ने अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस की न्याय यात्रा के बीच 2026 में जेनी केस को फिर सार्वजनिक बहस में उठाया।
Q. 2003 में इस मामले में क्या हुआ था?
2003 में जेनी ने हरक सिंह रावत को अपने बच्चे का पिता बताया था। इसके बाद सीबीआई जांच हुई और आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
Q. हरक सिंह रावत का पक्ष क्या है?
हरक सिंह रावत का कहना है कि सीबीआई और डीएनए जांच पहले हो चुकी है। उन्होंने अदालत के फैसले और जांच रिपोर्ट को न्यायालय की मंजूरी मिलने का हवाला दिया है।
Q. इस मामले का 2027 चुनाव से क्या संबंध है?
हरक सिंह रावत कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। इसलिए भाजपा के आरोपों और जेनी की शिकायत को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।










