मसूरी में बढ़ते पर्यटन, ट्रैफिक और निर्माण के बीच शहर की भूगर्भीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक, मसूरी का 43.9% हिस्सा मध्यम से बेहद ज्यादा भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। इसके बावजूद नई सड़क और निर्माण परियोजनाओं पर काम जारी है।

वीकेंड पर मसूरी जाने वाले पर्यटकों को माल रोड से प्रवेश मार्गों तक लंबा जाम, पार्किंग की कमी और सड़कों पर बढ़ता दबाव दिखाई देता है। स्थानीय लोग भी अपने घरों तक पहुंचने में मुश्किल की शिकायत करते हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट और आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल ट्रैफिक तक सीमित नहीं है।

पुराने चेतावनी संकेतों के बावजूद बढ़ता निर्माण

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के 2001 के एक अध्ययन में कहा गया था कि मसूरी में अब और निर्माण की गुंजाइश नहीं बची है। इसके बाद भी शहर में निर्माण गतिविधियां जारी रहीं। जनवरी 2023 में जोशीमठ के धंसने की घटना के बाद मसूरी की वहन क्षमता पर बहस फिर तेज हुई।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मसूरी के मामले पर ध्यान दिया और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति बनाई। समिति का उद्देश्य यह देखना था कि शहर कितनी इमारतों, पर्यटकों और वाहनों का दबाव सह सकता है।

राज्य की रिपोर्ट में भूस्खलन जोखिम वाले इलाकों के रूप में भट्टा फॉल, जॉर्ज एवरेस्ट, कैंप्टी फॉल और बार्लोगंज का विशेष ध्यान रखने की बात सामने आई है। मसूरी भूकंपीय क्षेत्र 4 में भी आता है।

पर्यटकों और सुविधाओं के बीच बढ़ता अंतर

साल 2000 में मसूरी आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 8.5 लाख थी। 2019 तक यह आंकड़ा 30 लाख से ज्यादा हो गया। शहर में 303 होटल, 201 होमस्टे और 17,000 से अधिक बिस्तर हैं। इसके मुकाबले करीब 1,240 वाहनों के लिए ही पार्किंग उपलब्ध है। अस्पतालों में कुल 63 बिस्तर बताए गए हैं।

मसूरी की सड़कों की लंबाई भी 1990 के 219 किलोमीटर से बढ़कर 2023 में 585 किलोमीटर हो गई। इसके बावजूद ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। ये आंकड़े शहर के बुनियादी ढांचे और बढ़ते दबाव के बीच अंतर दिखाते हैं।

रिपोर्ट की 19 सिफारिशों पर सवाल

रिपोर्ट में सरकार के लिए 19 काम सुझाए गए थे। इनमें बड़े प्रोजेक्ट से पहले जमीन की सही जांच, ऊंची इमारतों का हर एक या 2 साल में ऑडिट और जल निकासी व्यवस्था सुधारना शामिल था।

रिपोर्ट में प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा, सीवेज और कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने और पर्यटकों का पंजीकरण करने की भी सिफारिश की गई थी। पर्यटकों की संख्या को पार्किंग और उपलब्ध कमरों की क्षमता से जोड़ने तथा शहर की सफाई के लिए शुल्क लेने का सुझाव भी दिया गया था।

रिपोर्ट के करीब 3 साल बाद भी इन सिफारिशों के लागू होने पर सवाल उठ रहे हैं। मार्च में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया और “substantial action” नहीं होने पर जवाब मांगा।

नागरिक समूहों ने उठाए नए प्रोजेक्ट पर सवाल

सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून के अनूप नौटियाल का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाबों से पता चलता है कि जीआईएस सिस्टम, जल निकासी योजना और पर्यटक पंजीकरण जमीन पर प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जल निकासी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हुई, लेकिन वह कागजों तक सीमित रह गई।

इसी समूह के हिमांशु अरोड़ा ने प्रस्तावित झाझरा-मसूरी सड़क को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि इस परियोजना में 20,000 से 25,000 पेड़ काटे जा सकते हैं। परियोजना में जॉर्ज एवरेस्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास 2 सुरंगों का भी जिक्र है। समूह ने किमाड़ी-लंबीधार-कंपनी गार्डन सड़क के चौड़ीकरण को भी चुनौती दी है।

सितंबर में समूह ने यह मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट के सामने रखा। अदालत ने समूह से मुख्य सचिव के साथ बैठक कर अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखने को कहा।

मसूरी की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर है, इसलिए सवाल पर्यटन रोकने का नहीं है। मुद्दा यह है कि भूस्खलन जोखिम, सीमित पार्किंग, अस्पतालों की क्षमता और बढ़ते निर्माण को एक साथ देखते हुए शहर की सीमा तय की जाए।

निष्कर्ष

मसूरी की सरकारी रिपोर्ट शहर के 43.9% हिस्से को भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्र में रखती है। 2001 की चेतावनी, बढ़ते पर्यटक दबाव और सीमित सुविधाओं के बीच रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करना अब मुख्य सवाल है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मसूरी का कितना हिस्सा भूस्खलन जोखिम में है?

रिपोर्ट के मुताबिक, मसूरी का 43.9% हिस्सा मध्यम से बेहद ज्यादा भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्रों में है।

Q. मसूरी में किन जगहों को विशेष सावधानी वाला बताया गया है?

भट्टा फॉल, जॉर्ज एवरेस्ट, कैंप्टी फॉल और बार्लोगंज को विशेष सावधानी वाले क्षेत्रों में बताया गया है।

Q. मसूरी किस भूकंपीय क्षेत्र में आता है?

मसूरी भूकंपीय क्षेत्र 4 में आता है।

Q. मसूरी में कितने पर्यटक आते हैं?

साल 2000 में करीब 8.5 लाख पर्यटक आए थे। 2019 तक यह संख्या 30 लाख से ज्यादा हो गई।

Q. रिपोर्ट में कितनी सिफारिशें की गई थीं?

रिपोर्ट में सरकार के लिए 19 काम सुझाए गए थे। इनमें जल निकासी, कचरा प्रबंधन, निर्माण जांच और पर्यटक पंजीकरण शामिल हैं।

Q. नागरिक समूहों ने किस सड़क परियोजना पर चिंता जताई है?

सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून ने झाझरा के रास्ते प्रस्तावित नई मसूरी सड़क और किमाड़ी-लंबीधार-कंपनी गार्डन सड़क चौड़ीकरण पर सवाल उठाए हैं।