मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ में प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए करीब 440 संकेतकों के आधार पर दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए गए हैं। विजन में वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹28 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय को लगभग ₹20 लाख रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है। बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने की योजना बनाई गई है। ये लक्ष्य राज्य के दीर्घकालिक विकास रोडमैप का हिस्सा हैं।
परिवार व्यवस्था के लिए प्रस्तावित ढांचा
देवभूमि परिवार व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तर पर ‘देवभूमि परिवार प्राधिकरण’ बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही जिलों में ‘जिला देवभूमि परिवार अधिकारी’ की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इस व्यवस्था के तहत किसी विभाग या अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारियों का विवरण की जानकारी अभी नहीं है।
ऊर्जा, पर्यावरण और रोजगार पर जोर
विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।
वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे स्पष्ट है कि विजन में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी दीर्घकालिक योजना का हिस्सा बनाया गया है।
अलग-अलग वर्षों के लिए लक्ष्य
‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ में वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इन लक्ष्यों के आधार पर विभागीय कार्ययोजनाएं तैयार करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दीर्घकालिक लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से लागू करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विभागों की कार्ययोजनाओं और प्रगति की समीक्षा इसी लक्ष्य-आधारित ढांचे के अनुसार की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार, प्रशासन और जनभागीदारी के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प में राज्य के योगदान से भी जोड़ा।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी और श्री खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सेतु आयोग के सलाहकार श्री दिनेश अग्रवाल, मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन और प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु मौजूद रहे। सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. सोनिया पंत और श्री आदित्य कुमार सहित जनप्रतिनिधि और शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी और जिलास्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े।
निष्कर्ष
‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ में अर्थव्यवस्था, आय, रोजगार, गरीबी, ऊर्जा और वन आच्छादन से जुड़े बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। अब इन लक्ष्यों के आधार पर विभागीय कार्ययोजनाएं बनाकर उनकी नियमित समीक्षा की जानी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ में कितने संकेतकों का इस्तेमाल किया गया है?
करीब 440 संकेतकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए गए हैं।
Q. वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य कितना है?
वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹28 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
Q. प्रति व्यक्ति आय के लिए क्या लक्ष्य तय किया गया है?
प्रति व्यक्ति आय को लगभग ₹20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
Q. बेरोजगारी और बहुआयामी गरीबी के लिए क्या लक्ष्य है?
बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया गया है।
Q. ऊर्जा क्षमता और वन आच्छादन को लेकर क्या लक्ष्य है?
स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
Q. विजन में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है?
कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।
Q. विजन के तहत आगे क्या किया जाएगा?
वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लक्ष्यों के आधार पर विभागीय कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी और प्रगति की नियमित समीक्षा होगी।













