नैनीताल हाईकोर्ट ने रामनगर के पूछड़ी और रानीखेत रोड के निवासियों को राहत दी है। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों का पक्ष सुने बिना उनके निर्माण पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

अदालत ने फिलहाल 4 महीने तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखें। इस आदेश से उन लोगों को राहत मिली है, जिनके निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की बात सामने आई थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति से 3 सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यह समिति हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनाई गई थी।

सरकारी जमीन की जियो मैपिंग के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को सभी सरकारी जमीन की जियो मैपिंग कराने को कहा है। अदालत ने इस जानकारी को डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए हैं।

इसके अलावा कोर्ट ने वन पंचायतों की सीमाएं तय करने को कहा है। आदेश का उद्देश्य सरकारी जमीन और वन पंचायतों से जुड़ी सीमाओं की जानकारी को स्पष्ट करना है।

पदमपुरी की शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह मामला नैनीताल जिले के पदमपुरी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत से शुरू हुआ था। दिल्ली के एक व्यक्ति ने इस संबंध में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था। अदालत ने उस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।

इस मामले में हाईकोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को सभी जिलाधिकारियों और प्रभागीय वन अधिकारियों यानी डीएफओ को अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने बाद में दोबारा निर्देश जारी किए।

अवैध रिसॉर्ट और अतिक्रमण पर पहले के निर्देश

अदालत ने खाम जमीन समेत अन्य स्थानों पर बने अवैध रिसॉर्ट और अतिक्रमण को तत्काल हटाने के लिए भी कहा था। मौजूदा सुनवाई में रामनगर के पूछड़ी और रानीखेत रोड के निवासियों को राहत देते हुए अदालत ने पक्ष सुने बिना कार्रवाई पर रोक का निर्देश दिया है।

अब याचिकाकर्ताओं को प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखना है। वहीं, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति को 3 सप्ताह में मामले की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने रामनगर के पूछड़ी और रानीखेत रोड के निवासियों के खिलाफ पक्ष सुने बिना दंडात्मक कार्रवाई और फिलहाल 4 महीने तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई है। अदालत ने प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ सरकारी जमीन की जियो मैपिंग और वन पंचायतों की सीमाएं तय करने के निर्देश भी दिए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. हाईकोर्ट ने किसे राहत दी है?

रामनगर के पूछड़ी और रानीखेत रोड के निवासियों को राहत दी गई है।

Q. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कितने समय की रोक है?

अदालत ने फिलहाल 4 महीने तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई है।

Q. प्रशासन निवासियों के खिलाफ क्या नहीं कर सकता?

प्रशासन उनका पक्ष सुने बिना उनके निर्माण पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता।

Q. याचिकाकर्ताओं को अब क्या करना है?

उन्हें अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखना है।

Q. समिति से रिपोर्ट कब मांगी गई है?

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति से 3 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।

Q. हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?

अदालत ने सरकारी जमीन की जियो मैपिंग कराने और इसकी जानकारी डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक करने को कहा है।

Q. मामला मूल रूप से किस क्षेत्र की शिकायत से शुरू हुआ था?

मामला नैनीताल के पदमपुरी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत से शुरू हुआ था।