नैनीताल जिले के ज्यौलीकोट और आसपास के इलाकों में पेयजल को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में कई स्थानों के पानी में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस पाए गए। ये बैक्टीरिया इंसानों और जानवरों के मल में मिलते हैं।
इस प्रकोप से 250 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण में 2 से 3 लोगों की मौत का उल्लेख है। इनमें 16 वर्षीय छात्र रितेश जीना और 26 वर्षीय नीमा जोशी के नाम शामिल हैं। बीमारियों में पीलिया, टाइफाइड और उल्टी-दस्त बताए गए हैं।
10 जगहों से लिए गए पानी के नमूनों में बैक्टीरिया
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 सितंबर को ज्यौलीकोट क्षेत्र के 10 अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने लिए थे। इनकी जांच हल्द्वानी और देहरादून की मुख्य प्रयोगशालाओं में कराई गई। रिपोर्ट में प्रति 100 ML पानी में बैक्टीरिया की संख्या 170 से 2200 तक दर्ज हुई।
जिन जगहों के नमूनों में बैक्टीरिया मिले, उनमें मनोरा, बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान और वीरभट्टी स्थित चीनागांव शामिल हैं। पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय के पास, देवुबागांजा वाटर टैंक और पीएमजीएसवाई कार्यालय के पास से लिए गए नमूने भी जांच में शामिल थे। चौपड़ा के बुशगांव वाटर टैंक और सरियाताल टैंक के नमूनों में भी बैक्टीरिया दर्ज किए गए।
जल संस्थान की जांच व्यवस्था पर सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद जल संस्थान की नियमित प्रयोगशाला जांच पर सवाल उठे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनुराग नेगी के अनुसार, पुष्टि के लिए विभागीय टीम को नए नमूने लेने भेजा गया है।
फीकल बैक्टीरिया की मौजूदगी पानी में सीवेज या मल के मिलने का संकेत मानी जाती है। ऐसे पानी के सेवन से टाइफाइड, पीलिया, हैजा, डायरिया, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी बीमारियां हो सकती हैं। स्रोत सामग्री में बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसके गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का भी उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को सौंपी निगरानी
नैनीताल हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों और जल संस्थान को फटकार लगाई है। कोर्ट के अनुसार, ग्रामीण लंबे समय से बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को मामले की सीधी निगरानी करने को कहा है। इसके साथ पूरे नैनीताल क्षेत्र में पानी की दोबारा जांच कराने और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने का निर्देश दिया गया है।
निष्कर्ष
ज्यौलीकोट क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। नए नमूनों की जांच और पूरे नैनीताल क्षेत्र की दोबारा टेस्टिंग से स्थिति की अगली आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ज्यौलीकोट के पानी में क्या मिला है?
जांच में फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया मिले हैं। ये बैक्टीरिया इंसानों और जानवरों के मल में पाए जाते हैं।
Q. पानी के नमूने कब लिए गए थे?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 सितंबर को 10 अलग-अलग स्थानों से नमूने लिए थे।
Q. नमूनों की जांच कहां हुई?
नमूनों की जांच हल्द्वानी और देहरादून स्थित मुख्य प्रयोगशालाओं में कराई गई।
Q. पानी में बैक्टीरिया की मात्रा कितनी मिली?
प्रति 100 ML पानी में बैक्टीरिया की संख्या 170 से 2200 तक दर्ज की गई।
Q. इस प्रकोप से कितने लोग बीमार हुए हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 250 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं।
Q. मौतों को लेकर क्या जानकारी है?
स्रोत सामग्री में 2 से 3 मौतों का उल्लेख है। इनमें रितेश जीना और नीमा जोशी के नाम शामिल हैं।
Q. हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
मुख्य सचिव को मामले की निगरानी, पूरे नैनीताल क्षेत्र में पानी की दोबारा जांच और अधिकारियों से जवाब लेने का निर्देश दिया गया है।









