नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल से जुड़ी बीमारी के मामले में जल संस्थान और जल निगम के 6 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। जल संस्थान के नैनीताल अधिशासी अभियंता अनीश एम पिल्लई को लापरवाही के आरोप में चेतावनी जारी की गई है।
यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई, जिसमें 20 जून से ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी फैलने की बात सामने आई थी। पीलिया और डायरिया से 2 लोगों की मौत हुई, जबकि 400 से अधिक लोग बीमार पड़े। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी और प्रदर्शन भी हुए।
जल संस्थान के 3 इंजीनियरों पर कार्रवाई
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने सोमवार को 3 अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए। इनमें हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, नैनीताल के सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रविंद्र शामिल हैं।
विभाग ने नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश एम पिल्लई को चेतावनी दी है। उनके खिलाफ मामले में लापरवाही को लेकर यह कदम उठाया गया है।
जल निगम के 3 अधिकारी भी निलंबित
इसके बाद जल निगम में भी 3 अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। जल निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह के निलंबन के आदेश दिए। मुख्य अभियंता संजय सिंह ने प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्य और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु के निलंबन का आदेश जारी किया।
जल निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर की गई। 22 अगस्त को जिला योजना और विभागीय समीक्षा बैठक में इन अभियंताओं ने संबंधित पेयजल लाइन को विभागीय नहीं बताया था। बाद में यह सूचना गलत पाई गई, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई हुई।
हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान
मामले को लेकर रवि बिष्ट ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों ने जल स्रोतों की सफाई तथा पानी की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपलिंग को गंभीरता से नहीं लिया।
याचिका में यह भी कहा गया कि ज्योलीकोट में बीमारी फैलने की जानकारी मिलने के बावजूद अधिकारियों ने समय पर ध्यान नहीं दिया। जल निगम के अधिकारियों पर संबंधित लाइन को अपने विभाग की नहीं बताने का भी आरोप लगाया गया। इन आरोपों को याचिका में रखा गया था; उपलब्ध जानकारी में अदालत के अंतिम फैसले का उल्लेख नहीं है।
प्रभावित इलाकों में क्या कदम उठाए गए
बीमारी और मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग तथा जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में कई काम शुरू किए। इनमें स्वास्थ्य शिविर लगाना, घर-घर सर्वे करना, रक्त और पानी की जांच कराना तथा पानी में क्लोरीनेशन शामिल था।
लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए टैंकर लगाए गए। इसके अलावा पानी की टंकियों की सफाई और सीवर लाइन को ठीक कराने की कार्रवाई भी शुरू की गई। इन कदमों का उद्देश्य बीमारी से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य जांच और पेयजल व्यवस्था को संभालना था।
निष्कर्ष
ज्योलीकोट में दूषित पेयजल से हुई मौतों और बीमारी के बाद 6 इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। मामले में हाई कोर्ट का संज्ञान और जनहित याचिका भी सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभागीय कार्रवाई का आधार लापरवाही और पेयजल लाइन से जुड़ी गलत सूचना रही।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ज्योलीकोट में बीमारी कब फैली थी?
20 जून से ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी फैलने की बात सामने आई थी।
Q. बीमारी से कितने लोगों की मौत हुई?
पीलिया और डायरिया से 2 लोगों की मौत हुई थी।
Q. कितने लोग बीमार पड़े थे?
400 से अधिक लोग बीमार पड़े थे।
Q. कितने इंजीनियर निलंबित किए गए हैं?
जल संस्थान और जल निगम के कुल 6 इंजीनियरों को निलंबित किया गया है।
Q. जल संस्थान के किस अधिकारी को चेतावनी मिली है?
नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश एम पिल्लई को चेतावनी जारी की गई है।
Q. मामले में हाई कोर्ट की भूमिका क्या रही?
हाई कोर्ट ने ज्योलीकोट में दूषित पेयजल और बीमारी के मामले का संज्ञान लिया था। रवि बिष्ट ने इस विषय पर जनहित याचिका भी दायर की थी।








