उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का सवाल राज्य गठन के बाद से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। पहाड़ में राजधानी बनाने की मांग के बीच तत्कालीन सरकार ने 11 जनवरी 2001 को न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त वीरेंद्र दीक्षित की अध्यक्षता में एक सदस्यीय राजधानी चयन आयोग बनाया था।

आयोग का काम स्थायी राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान तलाशना था। शुरुआत में उसे 3 महीने का समय दिया गया, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों के दौरान आयोग का कार्यकाल 10 से 11 बार बढ़ाया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 अगस्त 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को सौंपी। रिपोर्ट 13 जुलाई 2009 को विधानसभा में रखी गई।

80 पन्नों की रिपोर्ट में गैरसैंण के साथ देहरादून, काशीपुर, रामनगर और ऋषिकेश क्षेत्र को भी विकल्प के रूप में देखा गया। रिपोर्ट के मीडिया विवरणों के अनुसार, आयोग ने देहरादून को सबसे अच्छा और काशीपुर को दूसरा बेहतर विकल्प माना।

गैरसैंण के सामने बताई गईं 17 मुश्किलें

आयोग ने गैरसैंण की भौगोलिक स्थिति, संपर्क सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया। रिपोर्ट में गैरसैंण को स्थायी राजधानी के लिए विकसित करने के खिलाफ 17 आधार बताए गए।

इनमें सड़क, रेल और हवाई संपर्क की कमी, पानी की उपलब्धता, भूकंप का खतरा, विकास के लिए जमीन की कमी और पर्यावरण पर संभावित असर जैसे मुद्दे शामिल थे। तकनीकी अध्ययन के लिए आयोग ने योजना और वास्तुकला विद्यालय, नई दिल्ली (School of Planning and Architecture - SPA, New Delhi) की मदद ली थी। शोध छात्रा अर्जिता बंसल के शोध आंकड़ों को भी आधार बनाया गया।

आयोग ने राजधानी के बारे में लोगों और संस्थाओं से सुझाव भी मांगे थे। कुल 268 सुझाव मिले। इनमें 192 व्यक्तियों, 49 संस्थाओं और 15 राजनीतिक दलों या संगठनों के सुझाव शामिल बताए गए। इनमें 126 सुझाव गैरसैंण के पक्ष में थे।

रिपोर्ट के बाद गैरसैंण में बढ़ीं विधानसभा से जुड़ी गतिविधियां

दीक्षित आयोग की रिपोर्ट आने के 5 साल बाद 14 जनवरी 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास किया। यह स्थान गैरसैंण से करीब 14 किमी दूर है। शिलान्यास समारोह मकर संक्रांति पर सुबह लगभग 11 बजे हुआ था।

हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में नवंबर 2016 में भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन का लोकार्पण हुआ। वहीं पहली बार आधिकारिक विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद भवन से जुड़ी अन्य सुविधाओं को विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

इसके बाद 4 मार्च 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की। राज्यपाल की मंजूरी के बाद 8 जून 2020 को इस फैसले को औपचारिक दर्जा मिला।

राजधानी की मांग का आंदोलन से पुराना संबंध

गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग उत्तराखंड राज्य बनने से पहले की है। 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने यह मांग उठाई थी। उस समय उत्तर प्रदेश से अलग राज्य बनाने का आंदोलन चल रहा था। 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बना, लेकिन स्थायी राजधानी को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो सका।

गैरसैंण समर्थकों के लिए पहाड़ में राजधानी की मांग राज्य आंदोलन की भावना और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ी रही। दूसरी ओर, दीक्षित आयोग ने प्रशासनिक ढांचे, संपर्क सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर देहरादून को अधिक व्यावहारिक विकल्प माना।

निष्कर्ष

दीक्षित आयोग की रिपोर्ट ने गैरसैंण के सामने संपर्क, संसाधन, आपदा जोखिम, जमीन और पर्यावरण से जुड़ी मुश्किलें रखीं। रिपोर्ट में देहरादून को बेहतर विकल्प बताया गया, लेकिन गैरसैंण को लेकर राजनीतिक और भावनात्मक बहस खत्म नहीं हुई। 2020 में उसे ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिला, जबकि स्थायी राजधानी का अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का फैसला कब से लंबित है?

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से स्थायी राजधानी का सवाल लंबित है। 2000 में राज्य बनने के बाद भी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ।

Q. राजधानी चयन आयोग कब बनाया गया था?

न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त वीरेंद्र दीक्षित की अध्यक्षता में आयोग 11 जनवरी 2001 को बनाया गया था।

Q. दीक्षित आयोग ने अपनी रिपोर्ट कब सौंपी?

आयोग ने रिपोर्ट 17 अगस्त 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को सौंपी थी।

Q. रिपोर्ट विधानसभा में कब रखी गई?

राजधानी चयन आयोग की रिपोर्ट 13 जुलाई 2009 को उत्तराखंड विधानसभा में रखी गई थी।

Q. आयोग ने देहरादून को बेहतर विकल्प क्यों माना?

रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून में पहले से प्रशासनिक ढांचा, संपर्क सुविधाएं और बुनियादी संसाधन मौजूद थे।

Q. गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा कब मिला?

4 मार्च 2020 को इसकी घोषणा हुई थी। राज्यपाल की मंजूरी के बाद 8 जून 2020 को इसे औपचारिक दर्जा मिला।

Q. गैरसैंण में विधानसभा भवन कब शुरू हुआ?

भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन का लोकार्पण नवंबर 2016 में हुआ और वहां पहली बार आधिकारिक सत्र बुलाया गया।