देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आने वाले वर्षों में ‘लेखक गांव’ विचारों के सृजन का तीर्थस्थल बन सकता है। उनके मुताबिक, यह ऐसी जगह होगी जहां नई पीढ़ी अपने विचारों को आकार दे सकेगी और भारत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक नजरिये से जोड़ने का काम करेगी।
धामी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को लेखकों, कवियों और रचनाकारों की प्रेरणा से महत्वपूर्ण ताकत मिली थी। इन रचनाकारों ने लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के गठन और राज्य आंदोलन में साहित्यिक समुदाय की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड 26 साल पहले अस्तित्व में आया था और उस समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। उनके अनुसार, राज्य आंदोलन को स्थानीय लेखकों, साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के महत्वपूर्ण योगदान से मजबूती मिली।
साहित्यिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना
धामी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार राज्य को साहित्यिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से 2 ‘साहित्य ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं।
इन साहित्य ग्रामों में लेखकों के लिए रहने की सुविधाएं और अध्ययन कक्ष उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन केंद्रों से लेखकों को रचनात्मक काम के लिए बेहतर माहौल मिलेगा और उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद होगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री से प्रेरित है। धामी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
लेखकों और नई पीढ़ी पर जोर
मुख्यमंत्री ने ‘लेखक गांव’ को केवल लेखन से जुड़ी जगह के तौर पर नहीं, बल्कि विचार निर्माण के केंद्र के रूप में पेश किया। उनका कहना है कि यहां नई पीढ़ी परंपरा और आधुनिकता के बीच बेहतर संबंध समझ सकेगी।
इस योजना के जरिए सरकार साहित्य, रचनात्मकता और पर्यटन को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन दोनों साहित्य ग्रामों के स्थान और इन्हें पूरा करने की समयसीमा का उल्लेख नहीं है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘लेखक गांव’ को भविष्य में विचारों के सृजन का प्रमुख केंद्र बनाने की उम्मीद जताई है। सरकार 2 साहित्य ग्रामों के जरिए लेखकों को आवासीय सुविधाएं और अध्ययन के लिए जगह देने की योजना पर काम कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ‘लेखक गांव’ को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में ‘लेखक गांव’ विचारों के सृजन का तीर्थस्थल बन सकता है।
Q. ‘लेखक गांव’ का नई पीढ़ी को क्या लाभ मिलने की बात कही गई है?
यह नई पीढ़ी को विचारों को आकार देने और प्राचीन परंपराओं को आधुनिक नजरिये से जोड़ने का अवसर देगा।
Q. उत्तराखंड सरकार कितने साहित्य ग्राम विकसित कर रही है?
सरकार 2 ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
Q. साहित्य ग्रामों में कौन-सी सुविधाएं होंगी?
इनमें लेखकों के लिए आवासीय सुविधाएं और अध्ययन कक्ष उपलब्ध कराने की योजना है।
Q. उत्तराखंड के राज्य आंदोलन में किन लोगों के योगदान का उल्लेख हुआ?
मुख्यमंत्री ने स्थानीय लेखकों, साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के योगदान का उल्लेख किया।











