दिवाली पर पटाखों के साथ पोटाश और कार्बाइड गन का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य खतरा बन सकता है। एम्स दिल्ली के नेत्र रोग और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने लोगों को ऐसे विस्फोटक उपकरणों से दूर रहने की चेतावनी दी है। डॉक्टरों के अनुसार इनके धमाके से आंखों और शरीर पर गंभीर चोटें आ सकती हैं।
एम्स दिल्ली के नेत्र रोग विभाग में पिछली दिवाली करीब 150 घायल पहुंचे थे। इनमें 60 लोग पोटाश या कार्बाइड गन के धमाके में घायल हुए थे। विभाग के मुताबिक इन घायलों में हर व्यक्ति की एक या दोनों आंखें पूरी तरह खराब हो गई थीं। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भी करीब 80 गंभीर घायल पहुंचे थे। ये सभी पोटाश गन के धमाके की चपेट में आए थे।
विशेषज्ञों ने बताया कि हरियाणा के सोनीपत, पलवल, मेवात और हापुड़ के अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से पोटाश गन से घायल लोग अधिक संख्या में अस्पताल पहुंचे।
आंखों को 3 तरह की चोट
एम्स के नेत्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. नम्रता के अनुसार, पोटाश या कार्बाइड गन के धमाके से आंखों में रासायनिक, गर्मी से होने वाली और यांत्रिक चोट लग सकती है। इन चोटों के कारण आंख इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है कि उसे दोबारा ठीक कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में कई लोगों को आंख गंवानी पड़ती है।
एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवांगी साहा ने भी पोटाश गन के धमाकों में घायल होने वाले लोगों को लेकर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि विस्फोट में निकले रासायनिक पदार्थ और आग सबसे पहले आंख की बाहरी सतह को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके बाद कॉर्निया, लेंस, रेटिना और आंखों की भीतरी नसें प्रभावित हो सकती हैं।
एम्स दिल्ली के पूर्व नेत्र सर्जन डॉ. ब्रजेश लहरी के मुताबिक, रसायनों की अत्यधिक गर्मी से कॉर्निया की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। डॉ. नम्रता ने बताया कि पोटाश गन का इस्तेमाल पहले खेतों को पक्षियों से बचाने के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में यह दिवाली के जश्न का हिस्सा बन गई।
गोरखपुर में 10 लोगों की देखने की क्षमता खत्म
एम्स गोरखपुर के नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिचा अग्रवाल ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 60 लोग आंखों में चोट के साथ पहुंचे थे। यह अब तक की सबसे अधिक संख्या बताई गई। इनमें 20 लोग पोटाश गन से गंभीर रूप से घायल हुए थे। इन घायलों में 10 लोगों की देखने की क्षमता 0 हो गई थी।
उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में भी मामले
मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अदिति दुबे के अनुसार, दिवाली के दौरान हर साल दर्जनों लोग आतिशबाजी से घायल होकर अस्पताल पहुंचते हैं। स्रोत के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने पोटाश गन पर रोक लगाई है।
उत्तराखंड के देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रुद्रपुर और हरिद्वार मेडिकल कॉलेजों के साथ जिले के अस्पतालों में दिवाली के दौरान हर वर्ष 100 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। निदेशक चिकित्सा शिक्षा विभाग डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, सभी जिलों से आने वाले कुल मरीजों में करीब 20 लोग अपनी एक या दोनों आंखें खो देते हैं। इनमें बड़ी संख्या पोटाश गन के धमाकों से घायल लोगों की होती है।
हरियाणा के अंबाला सिविल अस्पताल में तैनात नेत्र सर्जन डॉ. पुनीत ने भी पिछले साल दिवाली के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का जिक्र किया।
निष्कर्ष
डॉक्टरों के बताए आंकड़े पोटाश और कार्बाइड गन से होने वाली चोटों की गंभीरता दिखाते हैं। धमाके से आंखों की बाहरी सतह से लेकर कॉर्निया, लेंस और रेटिना तक नुकसान पहुंच सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. पोटाश गन से किस तरह का खतरा है?
पोटाश गन के धमाके से आंखों और शरीर पर गंभीर चोट लग सकती है। आंखों में रासायनिक, गर्मी से होने वाली और यांत्रिक चोट हो सकती है।
Q. एम्स दिल्ली में पिछली दिवाली कितने घायल पहुंचे थे?
एम्स दिल्ली के नेत्र रोग विभाग में करीब 150 घायल पहुंचे थे। इनमें 60 लोग पोटाश या कार्बाइड गन के धमाके में घायल हुए थे।
Q. पोटाश गन से आंख का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हो सकता है?
धमाके से आंख की बाहरी सतह, कॉर्निया, लेंस, रेटिना और भीतरी नसें प्रभावित हो सकती हैं।
Q. गोरखपुर में पोटाश गन से घायल कितने लोग पहुंचे थे?
एम्स गोरखपुर में पिछले वर्ष 20 लोग पोटाश गन से गंभीर रूप से घायल होकर पहुंचे थे। इनमें 10 लोगों की देखने की क्षमता 0 हो गई थी।
Q. उत्तराखंड में दिवाली के दौरान कितने लोग घायल होते हैं?
उत्तराखंड के कुछ मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में दिवाली के दौरान हर वर्ष 100 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है।
Q. उत्तराखंड में कितने लोग आंखें खो देते हैं?
डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, सभी जिलों से आने वाले कुल मरीजों में करीब 20 लोग अपनी एक या दोनों आंखें खो देते हैं।









