चंपावत में बारिश के दौरान सड़क बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और बिजली-पानी की सप्लाई पर असर पड़ने जैसी सूचनाएं प्रशासन के लिए चुनौती होती हैं। इन सूचनाओं को समय पर संबंधित विभाग तक पहुंचाना जरूरी होता है। इसी व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए ज
निरीक्षण के दौरान उन्होंने जिले में बारिश की स्थिति, प्रमुख नदियों के जलस्तर और बंद मोटर मार्गों की जानकारी ली। साथ ही पेयजल और बिजली से जुड़ी शिकायतों को भी देखा। कंट्रोल रूम में दर्ज शिकायतों और उनके समाधान की स्थिति की भी जांच की गई।
अधिकारियों ने बताया कि कंट्रोल रूम में रोजाना आपदा और आम लोगों की समस्याओं से जुड़ी सूचनाएं दर्ज होती हैं। इसके बाद उन्हें संबंधित विभागों और अधिकारियों तक भेजा जाता है। जिलाधिकारी ने इस प्रक्रिया में एक बड़ी कमी पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि शिकायत आगे भेजने के बाद मामला खत्म नहीं मानना चाहिए। समाधान होने तक उसकी निगरानी और बाद में फॉलोअप लेना जरूरी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायत का समाधान होने के बाद विभाग से फॉलोअप रिपोर्ट ली जाए और रिकॉर्ड अपडेट किया जाए। जिन मामलों का तुरंत समाधान नहीं हो सकता, उनमें विभाग की ओर से की जा रही कार्रवाई और संभावित समय भी दर्ज किया जाए। इससे पेंडिंग शिकायतों की स्थिति साफ रहेगी और उनकी नियमित निगरानी हो सकेगी।
बारिश के मौसम में कंट्रोल रूम की भूमिका और बढ़ जाती है। सड़क बंद होने या किसी आपदा की सूचना में कुछ मिनट की देरी भी राहत-बचाव काम पर असर डाल सकती है। ऐसे में सूचना मिलने से लेकर संबंधित अधिकारी तक पहुंचने और कार्रवाई की पुष्टि होने तक पूरी प्रक्रिया को एक्टिव रखना जरूरी है।
जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम को 24 घंटे एक्टिव रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा की सूचना मिलते ही संबंधित एसडीएम, तहसील प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को तुरंत जानकारी दी जाए। साथ ही, रोजाना आने वाली शिकायतों की समीक्षा करने और उनकी प्रगति की जानकारी सीनियर अधिकारियों को देने को भी कहा। निरीक्षण के दौरान जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल और आपदा विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।








