चम्पावत के सीमांत इलाकों में पशुपालन से जुड़े लोगों को बकरियों की बिक्री के लिए आईटीबीपी के रूप में सुरक्षित बाजार मिला है। इससे स्थानीय पशुपालकों को अपनी बकरियां बेचने का एक भरोसेमंद माध्यम उपलब्ध हुआ है।
कैलाश फर्त्याल इस पहल से लाभ उठाने वाले पशुपालकों में शामिल हैं। उन्होंने पिछले 3 वर्षों में आईटीबीपी को करीब ₹6 लाख की बकरियों की सप्लाई की है। इस बिक्री से उनकी आजीविका को मजबूती मिली है।
पशुपालन से मजबूत हुई आजीविका
सीमांत क्षेत्र में रहने वाले पशुपालकों के लिए बकरियां आय का अहम जरिया हैं। बिक्री के लिए सुरक्षित बाजार मिलने से उन्हें अपने पशुधन का बेहतर इस्तेमाल करने का अवसर मिला है। कैलाश फर्त्याल की आय में हुई बढ़ोतरी इसी असर को दिखाती है।
आईटीबीपी को बकरियों की सप्लाई ने स्थानीय पशुपालकों और संस्थागत खरीदार के बीच सीधा जुड़ाव बनाया है। इससे बिक्री के लिए बाजार तलाशने की मुश्किल कम हुई है और पशुपालन से मिलने वाली आमदनी को सहारा मिला है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कैलाश फर्त्याल ने 3 वर्षों के दौरान करीब ₹6 लाख की बकरियां आईटीबीपी को दी हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सीमांत पशुपालकों के लिए स्थानीय स्तर पर बनी खरीद व्यवस्था आजीविका का मजबूत आधार बन सकती है।
निष्कर्ष
चम्पावत के सीमांत पशुपालकों को आईटीबीपी के जरिए बकरियों की बिक्री का सुरक्षित बाजार मिला है। कैलाश फर्त्याल की 3 वर्षों में करीब ₹6 लाख की सप्लाई ने दिखाया है कि इस व्यवस्था से पशुपालन आधारित आजीविका को मजबूती मिल रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. चम्पावत के पशुपालकों को किस संस्था से बकरियों की बिक्री का बाजार मिला?
आईटीबीपी से उन्हें बकरियों की बिक्री का सुरक्षित बाजार मिला है।
Q. कैलाश फर्त्याल ने कितने समय में कितनी बकरियों की सप्लाई की?
कैलाश फर्त्याल ने 3 वर्षों में करीब ₹6 लाख की बकरियों की सप्लाई की है।
Q. बकरियों की बिक्री से कैलाश फर्त्याल को क्या फायदा हुआ?
बकरियों की सप्लाई से उनकी आजीविका मजबूत हुई है।










