मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 25 अक्टूबर को हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने महोत्सव में मौजूद लोगों का स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ पर्वतीय समाज के लिए भी विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार, यह क्षेत्र कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं को व्यापक मंच देता है। महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को उन्होंने प्रदेशवासियों के अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़े होने का प्रमाण बताया।
युवा पीढ़ी को लोक विरासत से जोड़ने पर जोर
धामी ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के जरिए खास तौर पर युवा पीढ़ी को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान दे रहे हैं। वे उत्तराखण्ड की लोक विरासत को देश और विदेश तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति समृद्ध और विविध है। लोकगीतों और लोकनृत्यों में पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सुंदरता, मौसम में बदलाव, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाई देती है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाएं इस विरासत को संभाले हुए हैं।
इसी तरह बेड़ा गीत, मांगल गीत और चैती गीत उत्तराखण्ड के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा हैं। ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र भी प्रदेश की लोक संस्कृति को अलग पहचान देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन, लोक आस्थाओं और परंपराओं की झलक मिलती है।
डिजिटल माध्यमों से बाहर पहुंच रहा लोक संगीत
धामी ने कहा कि डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से उत्तराखण्ड का लोक संगीत प्रदेश की सीमाओं से बाहर पहुंच रहा है। इससे लोक संगीत को देश और विदेश में पहचान मिल रही है।
महोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कई फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। धामी के अनुसार, सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पर भी काम कर रही है। नकल माफिया पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रगति हुई है।
रामपुर तिराहा और अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है। उनके अनुसार, आंदोलनकारियों ने राज्य निर्माण के लिए कई मुश्किलों का सामना किया था।
धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों पर राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने न्यायालय द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और जमानत याचिकाओं से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून के अनुसार चलने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड के हित में बड़े और जरूरी फैसले लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उनके अनुसार, प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है।
निष्कर्ष
कुमाऊं द्वार महोत्सव में मुख्यमंत्री का मुख्य जोर उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, कलाकारों और युवा पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव पर रहा। भाषण में राज्य सरकार के फैसलों, राज्य आंदोलन और संवेदनशील न्यायिक मामलों का भी उल्लेख हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कुमाऊं द्वार महोत्सव कहां आयोजित हुआ?
यह महोत्सव हल्द्वानी में आयोजित हुआ।
Q. महोत्सव में मुख्य अतिथि कौन थे?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
Q. मुख्यमंत्री ने किन सांस्कृतिक विधाओं का उल्लेख किया?
उन्होंने छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाओं का उल्लेख किया।
Q. किन पारंपरिक वाद्य यंत्रों का जिक्र हुआ?
मुख्यमंत्री ने ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा का उल्लेख किया।
Q. लोक संस्कृति के संरक्षण में संस्था की क्या भूमिका बताई गई?
‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ लोकगायन और लोकनृत्य के जरिए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है।
Q. मुख्यमंत्री ने लोक संगीत के विस्तार को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के कारण उत्तराखण्ड का लोक संगीत देश और विदेश में पहचान बना रहा है।
Q. भाषण में किन संवेदनशील घटनाओं का उल्लेख हुआ?
रामपुर तिराहा गोलीकांड और अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख किया गया।











