द्वितीय केदार श्री मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवम्बर 2026 को शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं। इस वर्ष धाम की यात्रा के लिए अब 16 दिन शेष हैं। श्रद्धालुओं से कपाट बंद होने से पहले बाबा मध्यमहेश्वर के दर्शन करने की अपील की गई है।
यह जानकारी @RudraprayagPol की ओर से साझा की गई है। संदेश में मध्यमहेश्वर धाम को हिमालय की ऊंची चोटियों, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति से जुड़ा पवित्र स्थल बताया गया है। श्रद्धालुओं से इस यात्रा को आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का आग्रह किया गया है।
स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण पर जोर
अपील में धाम की स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। श्रद्धालुओं से प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखने में सहयोग देने की अपील की गई है।
मध्यमहेश्वर धाम की यात्रा को देवभूमि की अनमोल धरोहर से जुड़ा अनुभव बताया गया है। संदेश के अनुसार, यहां आने वाले लोग दर्शन के साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लेकर लौटें।
यात्रा का अवसर
कपाट बंद होने की तारीख नजदीक होने के कारण श्रद्धालुओं के पास दर्शन के लिए सीमित समय बचा है। संदेश में बाबा मध्यमहेश्वर के दर्शन का यह अवसर नहीं गंवाने और श्रद्धा व आस्था के साथ धाम पहुंचने की अपील की गई है।
निष्कर्ष
श्री मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवम्बर 2026 को शीतकाल के लिए बंद होंगे। कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए 16 दिन का समय बचा है। यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखना और प्लास्टिक से बचना जरूरी बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. श्री मध्यमहेश्वर धाम के कपाट कब बंद होंगे?
श्री मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवम्बर 2026 को शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं।
Q. कपाट बंद होने में अब कितना समय बचा है?
इस वर्ष की मध्यमहेश्वर धाम यात्रा के अब 16 दिन शेष हैं।
Q. श्रद्धालुओं से किन बातों की अपील की गई है?
श्रद्धालुओं से धाम की स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने और प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा करने की अपील की गई है।
Q. मध्यमहेश्वर धाम को किस रूप में बताया गया है?
इसे द्वितीय केदार और प्रकृति की सुंदरता व आध्यात्मिक शांति से जुड़ा पवित्र धाम बताया गया है।












