देवप्रयाग विकासखंड के पौसाड़ा गांव में बृहस्पतिवार सुबह एक पुराना मकान अचानक ढह गया। उस समय रामेश्वरी देवी (45) घर के छज्जे पर काम कर रही थीं। मकान में दरार और गिरने की आवाज सुनते ही उन्होंने नीचे छलांग लगा दी। इस तरह उनकी जान बच गई।
हादसे में मकान के मलबे के नीचे दबकर रामेश्वरी देवी की दुधारू भैंस मर गई। पति के निधन के बाद यही भैंस उनके परिवार की कमाई का मुख्य साधन थी। वह दूध बेचकर अपने बच्चों की परवरिश कर रही थीं।
परिवार पर आया संकट
रामेश्वरी देवी के 3 बच्चे हैं। उनकी 2 बेटियों की शादी हो चुकी है। हादसे के वक्त उनका 15 साल का बेटा किसी काम से बाहर गया हुआ था। परिवार पौसाड़ा गांव में 45 साल पुराने पठाल के मकान में रह रहा था।
मकान गिरने के बाद परिवार के सामने रहने और आजीविका, दोनों का संकट खड़ा हो गया है। दुधारू भैंस की मौत से दूध बेचकर होने वाली आमदनी भी बंद हो गई है।
मौके पर पहुंचे अधिकारी
ग्राम प्रधान रीता देवी ने सरकार से परिवार के लिए नया मकान बनवाने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने पीड़ित परिवार की स्थिति को देखते हुए मदद की जरूरत बताई।
पटवारी दिनेश बिजल्वाण और कानूनगो विशाल असवाल ने मौके पर पहुंचकर हुए नुकसान का जायजा लिया। उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से मुआवजे या नए मकान को लेकर कोई फैसला नहीं बताया गया है।
निष्कर्ष
पौसाड़ा में मकान गिरने से रामेश्वरी देवी की जान तो बच गई, लेकिन उनका घर और आजीविका का सहारा दोनों प्रभावित हुए हैं। मामले में नुकसान का जायजा लिया जा चुका है और परिवार ने सरकारी मदद की मांग की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. मकान गिरने की घटना कहां हुई?
यह घटना विकासखंड देवप्रयाग के पौसाड़ा गांव में बृहस्पतिवार सुबह हुई।
Q. रामेश्वरी देवी कैसे बचीं?
मकान गिरने की आवाज सुनकर वह छज्जे से नीचे कूद गईं। इससे उनकी जान बच गई।
Q. हादसे में किसकी मौत हुई?
मलबे में दबने से रामेश्वरी देवी की दुधारू भैंस की मौत हो गई।
Q. भैंस परिवार के लिए क्यों महत्वपूर्ण थी?
रामेश्वरी देवी दूध बेचकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। भैंस उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी।
Q. मौके पर कौन पहुंचे?
पटवारी दिनेश बिजल्वाण और कानूनगो विशाल असवाल ने मौके पर जाकर नुकसान का जायजा लिया।
Q. परिवार ने सरकार से क्या मांग की है?
ग्राम प्रधान रीता देवी ने परिवार के लिए नया मकान और उचित मुआवजा देने की मांग की है।








