हल्द्वानी। नैनीताल वन प्रभाग की मनोरा रेंज से लगे ग्रामीण इलाकों में गुलदार की बढ़ती आवाजाही ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जंगल के रास्तों से होकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को संभावित हमले से बचाने के लिए वन विभाग ने एक हजार से अधिक सीटियां बांटी हैं।

वन विभाग की टीमें प्राथमिक विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को जागरूक कर रही हैं। बच्चों को समूह में चलने, आसपास नजर रखने और खतरे का आभास होने पर जोर-जोर से सीटी बजाकर शोर करने को कहा जा रहा है। विभाग का मानना है कि सीटी और शोर से गुलदार को दूर भगाने में मदद मिल सकती है।

6 गांवों में गुलदार की आवाजाही

मनोरा रेंज से सटे बेलुवाखान, बोहरा गांव, पड़वाडांगर, बल्दियाखान, ज्योलीकोट और रानीबाग में गुलदार की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग के अनुसार, गुलदार जंगलों के साथ आबादी वाले इलाकों और घरों के आंगन तक पहुंच रहे हैं। इस दौरान मवेशियों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

इन गांवों में कई बच्चे जंगल से जुड़े रास्तों से स्कूल आते-जाते हैं। इसी वजह से विभाग ने बच्चों को अकेले चलने से बचने और समूह में रहने की जानकारी दी है। खतरे की स्थिति में शोर मचाने को भी सुरक्षा उपाय के तौर पर समझाया जा रहा है।

22 ग्राम पंचायतों में निगरानी की चुनौती

मनोरा रेंज से लगी करीब 22 ग्राम पंचायतों में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। रेंज में महज 15 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। सीमित स्टाफ के कारण सभी प्रभावित गांवों में एक साथ 24 घंटे गश्त करना संभव नहीं हो पा रहा है।

विभाग ने जागरूकता अभियान के साथ संवेदनशील जगहों पर कैमरा ट्रैप भी लगाए हैं। इनके जरिए गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों और बच्चों को सतर्क करने पर जोर इसलिए दिया जा रहा है, ताकि आबादी वाले इलाकों में संभावित खतरे को समय रहते पहचाना जा सके।

मनोरा रेंज के रेंजर नितिन पंत ने बताया कि करीब 6 गांवों में गुलदार का मूवमेंट है। उनके अनुसार, स्कूल आने-जाने वाले बच्चों पर हमले की आशंका को देखते हुए करीब एक हजार से ज्यादा सीटियां बांटी गई हैं। बच्चों को समूह में चलने और किसी भी तरह के खतरे का अंदेशा होने पर जोर-जोर से सीटी बजाने समेत कई बातें बताई जा रही हैं।

निष्कर्ष

मनोरा रेंज से लगे 6 गांवों में गुलदार की आवाजाही के बीच वन विभाग ने स्कूली बच्चों को एक हजार से अधिक सीटियां बांटकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। सीमित स्टाफ के कारण लगातार गश्त की मुश्किल के बीच कैमरा ट्रैप और जनसहभागिता के जरिए निगरानी की जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. किन इलाकों में गुलदार की आवाजाही बताई गई है?

बेलुवाखान, बोहरा गांव, पड़वाडांगर, बल्दियाखान, ज्योलीकोट और रानीबाग में गुलदार की आवाजाही बताई गई है।

Q. वन विभाग ने स्कूली बच्चों के लिए क्या किया है?

बच्चों को एक हजार से अधिक सीटियां बांटी गई हैं। उन्हें समूह में चलने और खतरे पर शोर करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

Q. खतरा महसूस होने पर बच्चों को क्या करने को कहा गया है?

बच्चों को जोर-जोर से सीटी बजाकर शोर करने को कहा गया है।

Q. मनोरा रेंज में कितने अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं?

मनोरा रेंज में 15 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं।

Q. गुलदार की निगरानी के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

संवेदनशील स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। इनके जरिए गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

Q. मनोरा रेंज से लगी कितनी ग्राम पंचायतें प्रभावित क्षेत्र में हैं?

मनोरा रेंज से करीब 22 ग्राम पंचायतें लगी हैं, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना चुनौती बना हुआ है।