उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि माणा गांव को अब भारत का ‘आखिरी गांव’ नहीं, बल्कि ‘पहला गांव’ माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण से सीमांत क्षेत्रों में सड़क, पुल, सुरंग और संचार नेटवर्क के विकास को नई दिशा मिली है।

धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी आदि कैलाश के पास स्थित गुंजी गांव का दौरा कर चुके हैं। उनके अनुसार, इसके बाद सीमांत इलाकों में सड़क निर्माण को बढ़ावा मिला और लिपुलेख तक सड़क पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले यह तर्क दिया जाता था कि सड़क निर्माण से दुश्मनों के लिए प्रवेश का रास्ता खुल सकता है। उनके मुताबिक, इसी सोच के कारण 60 से 70 साल निकल गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस व्यवस्था में बदलाव आया है। उनके अनुसार, सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास सुरक्षा और स्थानीय संपर्क, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि सड़कों, पुलों और सुरंगों के साथ optical fibre नेटवर्क तथा कुल connectivity पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

सीमांत गांवों में मैराथन और विकास की योजना

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मैराथन भी आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह हाल में आदि कैलाश गए थे, जहां गुंजी गांव में ‘आदि कैलाश रन’ आयोजित हुई।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मई में मलारी और नीती क्षेत्रों में एक बड़ी मैराथन आयोजित करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई प्रयासों के जरिए सीमावर्ती इलाकों को ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

धामी ने कहा कि बेहतर सड़क और संचार व्यवस्था से सीमांत इलाकों में आवाजाही बढ़ाने में मदद मिली है। उनके अनुसार, इससे सशस्त्र बलों की mobility बेहतर हुई और communication systems मजबूत हुए हैं।

सीमांत क्षेत्रों पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री के बयान में सीमांत गांवों के विकास को सड़क और पर्यटन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें सुरक्षा, संचार, स्थानीय गतिविधियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आयोजन को भी विकास योजना का हिस्सा बताया गया है।

माणा, गुंजी, लिपुलेख, मलारी और नीती जैसे क्षेत्र उत्तराखंड के ऊंचाई वाले सीमांत इलाकों से जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में सड़क और optical fibre जैसी सुविधाओं का विस्तार स्थानीय लोगों, प्रशासन और सुरक्षा बलों के लिए संपर्क बेहतर करने से जुड़ा है।

धामी ने यह भी कहा कि सीमांत क्षेत्रों में ऐसे आयोजन और ढांचागत काम जारी हैं। हालांकि, उनके बयान में सड़क, पुल, सुरंग या optical fibre परियोजनाओं की लागत, समयसीमा और पूरा होने की अलग-अलग जानकारी नहीं दी गई है।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमांत क्षेत्रों के विकास को सुरक्षा, connectivity और स्थानीय गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि माणा जैसे गांवों को भारत के ‘पहले गांव’ के रूप में विकसित करने पर जोर है। उन्होंने सड़क, पुल, सुरंग, optical fibre नेटवर्क और मैराथन जैसी पहलों का उल्लेख किया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माणा गांव के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि माणा अब भारत का ‘आखिरी गांव’ नहीं, बल्कि ‘पहला गांव’ माना जा रहा है।

Q. धामी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने किस गांव का दौरा किया?

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि कैलाश के पास स्थित गुंजी गांव का दौरा किया।

Q. लिपुलेख के बारे में मुख्यमंत्री ने क्या बताया?

उन्होंने कहा कि लिपुलेख तक सड़क बनाई गई है।

Q. सीमांत क्षेत्रों में कौन-कौन से काम हो रहे हैं?

धामी ने सड़क, पुल, सुरंग और optical fibre नेटवर्क के निर्माण तथा connectivity मजबूत होने की बात कही।

Q. गुंजी में कौन-सा आयोजन हुआ?

मुख्यमंत्री के अनुसार, गुंजी गांव में ‘आदि कैलाश रन’ आयोजित की गई।

Q. मलारी और नीती क्षेत्रों में क्या योजना है?

धामी ने बताया कि मई में इन क्षेत्रों में एक बड़ी मैराथन आयोजित करने की तैयारी है।

Q. इन पहलों का सुरक्षा पर क्या असर बताया गया?

धामी ने कहा कि बेहतर connectivity से सशस्त्र बलों की mobility और communication systems मजबूत हुए हैं।