मसूरी में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों और शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती अलग राज्य के लिए दिए गए बलिदानों की हमेशा ऋणी रहेगी।

मुख्यमंत्री इस बार कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके। खटीमा में सुबह करीब 8:30 बजे से तेज बारिश हो रही थी, जबकि उन्हें 10:30 बजे तक मसूरी पहुंचना था। मौसम की वजह से यात्रा संभव नहीं हुई। धामी ने कहा कि लगातार 5 वर्षों तक स्मृति दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इस बार मसूरी नहीं पहुंच पाना उन्हें व्यक्तिगत रूप से कष्ट दे रहा है। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

आंदोलन और बलिदान की स्मृति

धामी ने खटीमा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके विरोध में मसूरी में भी आंदोलन हुआ था। उनके मुताबिक, अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उनके पास हथियार नहीं थे और उनके मन में हिंसा का भाव भी नहीं था। उनका लक्ष्य बेहतर उत्तराखंड और अलग राज्य का निर्माण था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्कालीन व्यवस्था ने लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही आवाज को गोलियों से दबाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, आंदोलनकारियों के बलिदान ने अलग राज्य के संघर्ष को नई शक्ति और दिशा दी।

उन्होंने अमर बलिदानी बेलमती चौहान, हंसा धनाई, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मनमोहन ममगाईं को श्रद्धापूर्वक नमन किया। कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए जान गंवाने वाले डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहेगी स्मृति

धामी ने राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने शहीदों के परिजनों और कार्यक्रम में मौजूद आंदोलनकारियों को भी सम्मान दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों की स्मृतियां राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान से हमेशा जुड़ी रहेंगी और आने वाली पीढ़ियां इन बलिदानों को याद रखेंगी।

निष्कर्ष

मसूरी की श्रद्धांजलि सभा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के बलिदानों को याद किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने वर्चुअल माध्यम से शहीदों और आंदोलनकारियों को नमन करते हुए उनकी स्मृतियों को राज्य की पहचान से जुड़ा बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मसूरी में किस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा हुई?

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में सभा आयोजित की गई।

Q. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मसूरी क्यों नहीं पहुंच सके?

खटीमा में तेज बारिश के कारण वह मसूरी के कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके।

Q. मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि कैसे दी?

उन्होंने वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

Q. धामी ने किन बलिदानियों को नमन किया?

उन्होंने बेलमती चौहान, हंसा धनाई, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मनमोहन ममगाईं को नमन किया।

Q. डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी का उल्लेख क्यों हुआ?

मुख्यमंत्री ने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए जान गंवाने वाले डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी को भी श्रद्धांजलि दी।

Q. उत्तराखंड राज्य निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है।