चमोली जिले के भलागांव स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक दिवस पर भी पढ़ाई नहीं हो सकी। स्कूल में तैनात दोनों शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचे, जिसके चलते स्कूल में ताला लगा रहा। बच्चे और अभिभावक शिक्षकों के आने का इंतजार करते रहे।
शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, लेकिन भलागांव के इस सरकारी स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप रही। शिक्षकों की अनुपस्थिति को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है।
दोनों शिक्षकों के नहीं पहुंचने से बढ़ी नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में पहले ही शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं होना बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रहा है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष अंजना भट्ट ने कहा कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों की मनमानी पर रोक लगाने के साथ स्कूल की नियमित निगरानी की मांग की।
अभिभावक लज्जू देवी, रौशनी देवी, गुड्डी देवी, पुष्पा देवी, सुमन देवी, रीता देवी और अंजना देवी ने भी स्कूल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका आरोप है कि शिक्षकों के नियमित स्कूल नहीं आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कक्षा छह की छात्रा गुंजन भट्ट ने बताया कि स्कूल में कभी एक शिक्षक आते हैं तो कभी दूसरा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पा रही है। छात्रा के अनुसार, बच्चों को अपने सिलेबस में शामिल विषयों की भी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे उनकी पढ़ाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति के साथ विभागीय निगरानी भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि यदि स्कूलों की नियमित निगरानी की जाए तो शिक्षकों की अनुपस्थिति और पढ़ाई प्रभावित होने जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सकती है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने स्कूल में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा का अधिकार है। इसके लिए शिक्षकों की नियमित मौजूदगी और स्कूलों की लगातार निगरानी जरूरी है।








