बागेश्वर जिले के कपकोट विधानसभा क्षेत्र के थलीधार में सड़क की सुविधा नहीं होने का असर एक प्रसूता और उसके परिवार को झेलना पड़ा। जिला अस्पताल से प्रसव के बाद लौटने पर परिजनों ने उन्हें डोली में बैठाकर पथरीले रास्तों से पैदल घर पहुंचाया।

ग्रामीणों के सड़क आंदोलन का रविवार को 53वां दिन था। इसी दिन राजेंद्र सिंह दानू (43) और रमेश सिंह दानू (38) क्रमिक अनशन पर बैठे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद सड़क निर्माण के लिए शासन और प्रशासन ने अब तक ठोस कदम नहीं उठाया है।

सड़क नहीं होने से बढ़ी मुश्किल

थलीधार के दुर्गम क्षेत्र में सड़क का अभाव ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की आवाजाही और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना रहा है। प्रसव के बाद महिला को पैदल रास्ते से डोली में ले जाने की घटना ने बुनियादी सुविधाओं को लेकर चल रहे दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों ने साफ किया कि सड़क निर्माण का शासनादेश जारी होने तक उनका आंदोलन नहीं रुकेगा। उनका आरोप है कि 53 दिन बीतने के बाद भी उनकी मांग पर शासन स्तर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। इसी वजह से क्षेत्र में नाराजगी बनी हुई है।

आंदोलन में ये लोग रहे मौजूद

धरने और क्रमिक अनशन के दौरान समिति के अध्यक्ष पूर्व कैप्टन रतन सिंह दानू, संरक्षक चरण सिंह बघरी, संयोजक पूर्व कैप्टन महिमन सिंह दानू, सचिव करम सिंह दानू और उपाध्यक्ष शेर सिंह दानू मौजूद रहे। इनके साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी आंदोलन में शामिल हुए।

निष्कर्ष

थलीधार में सड़क की मांग को लेकर आंदोलन 53वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने शासनादेश मिलने तक विरोध जारी रखने का फैसला दोहराया है, जबकि सड़क के अभाव में प्रसूता को डोली से घर ले जाना क्षेत्र की मुश्किलों को सामने लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. थलीधार क्षेत्र किस विधानसभा क्षेत्र में आता है?

थलीधार क्षेत्र कपकोट विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह बागेश्वर जिले का दुर्गम इलाका है।

Q. ग्रामीण किस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?

ग्रामीण थलीधार क्षेत्र में सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। वे सड़क निर्माण का शासनादेश जारी करने की मांग पर अड़े हैं।

Q. आंदोलन कितने दिन से चल रहा है?

ग्रामीणों का आंदोलन रविवार को 53वें दिन में पहुंचा। उसी दिन क्रमिक अनशन भी जारी रहा।

Q. अनशन पर कौन बैठे?

राजेंद्र सिंह दानू (43) और रमेश सिंह दानू (38) क्रमिक अनशन पर बैठे।

Q. प्रसूता को घर कैसे ले जाया गया?

जिला अस्पताल में प्रसव के बाद परिजन प्रसूता को डोली में बैठाकर पथरीले रास्तों से पैदल घर ले गए।