टिहरी झील के आसपास बिना योजना के हो रहे विकास को नियंत्रित करने के लिए करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके साथ अलग-अलग हिस्सों के लिए जोनल प्लान भी बनाया जाएगा। इस दायरे में सरकारी और निजी, दोनों तरह की जमीन शामिल की जाएगी।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारियों को लेकर बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से पूरे इलाके के लिए एक समग्र योजना तैयार करने को कहा, ताकि भविष्य का विकास तय दिशा और जरूरत के मुताबिक हो सके।

योजना में किन बातों का ध्यान रखा जाएगा

मास्टर प्लान बनाते समय इलाके की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उनकी जरूरत के अनुसार जोन तय किए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने योजना तैयार करने से पहले सभी संबंधित हितधारकों से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। इससे स्थानीय स्तर की जरूरतों और क्षेत्र से जुड़े पक्षों के सुझावों को प्रस्तावित विकास योजना में शामिल किया जा सकेगा।

तकनीकी मदद के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली और एसपीए भोपाल की विशेषज्ञता लेने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इन संस्थानों से सहयोग मिलने पर मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीकी आधार मजबूत हो सकता है।

प्रधानमंत्री के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

बैठक में टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पूरी कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। प्रस्तावित गतिविधियों और विकास योजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार किया जाएगा। इसे प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी है।

निष्कर्ष

टिहरी झील क्षेत्र के लिए प्रस्तावित मास्टर और जोनल प्लान का उद्देश्य विकास को व्यवस्थित करना है। योजना में 8000 हेक्टेयर क्षेत्र, जमीन के अलग-अलग स्वामित्व, पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. टिहरी झील क्षेत्र में किस तरह की योजना बनाई जाएगी?

मास्टर प्लान के साथ अलग-अलग इलाकों के लिए जोनल प्लान भी तैयार किया जाएगा।

Q. प्रस्तावित मास्टर प्लान में कितना क्षेत्र शामिल होगा?

इसमें टिहरी झील के आसपास का करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया जाएगा।

Q. क्या निजी जमीन भी योजना का हिस्सा होगी?

हां, योजना में सरकारी और निजी दोनों प्रकार की जमीन शामिल की जाएगी।

Q. प्लान तैयार करते समय किन पहलुओं को देखा जाएगा?

भौगोलिक स्थिति, स्थानीय जरूरतें, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा।

Q. मास्टर प्लान के लिए तकनीकी सहयोग किससे लेने पर विचार है?

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली और एसपीए भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

Q. टिहरी झील की विकास योजना का प्रेजेंटेशन किसके सामने रखा जाएगा?

समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी है।