फिल्म ‘पायर’ देखकर दर्शकों के भावुक होने की चर्चा है। उत्तराखंड के बुजुर्गों और पहाड़ों में पीछे छूट गए लोगों की जिंदगी को दिखाने वाली फिल्म कई लोगों को अपनी वास्तविकता जैसी लग रही है। रुद्रप्रयाग के एक गांव की घटना ने इस चर्चा को जमीन से जोड़ दिया है।
रुद्रप्रयाग के मुर्चौड़ा पालिगाड़ गांव में 85 वर्षीय फतेराम सेमवाल की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें निकटतम सड़क तक पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ा। उन्हें मुश्किल और पथरीले पहाड़ी रास्ते से होकर ले जाया गया।
यह गांव भरदार पट्टी की चौंडा सिराई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव सड़क सुविधा का इंतजार लंबे समय से कर रहा है। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए करीब 2 किलोमीटर रास्ते की मांग बार-बार उठाई जाती रही है।
कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने स्वैच्छिक श्रम से रास्ता साफ करने की कोशिश भी की। इसके बावजूद गांव तक सड़क पहुंचाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। सड़क के अभाव में बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किल झेलनी पड़ती है।
कुमाऊं जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा है कि सड़क से जुड़ी प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग भी रास्ते में आ रही अड़चनों को दूर करने पर काम कर रहा है। हालांकि, गांव तक सड़क कब पहुंचेगी, इसकी तारीख उपलब्ध जानकारी में नहीं बताई गई है।
फिल्म की भावनाओं से गांव की हकीकत तक
‘पायर’ में उत्तराखंड के बुजुर्गों और पहाड़ों में रह गए लोगों के संघर्ष को दिखाया गया है। दर्शक फिल्म देखकर भावुक हो रहे हैं, लेकिन मुर्चौड़ा पालिगाड़ की घटना बताती है कि ऐसे संघर्ष केवल पर्दे तक सीमित नहीं हैं।
फतेराम सेमवाल को सड़क तक ले जाने की घटना गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाती है। सड़क नहीं होने पर इलाज, आवाजाही और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी लोगों को कठिन रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग करीब 2 किलोमीटर सड़क की है। उन्होंने रास्ता साफ करने के लिए खुद श्रमदान किया, जबकि प्रशासन की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ने और वन विभाग के स्तर पर अड़चन दूर करने की बात कही गई है।
निष्कर्ष
‘पायर’ ने पहाड़ के बुजुर्गों और गांवों की मुश्किलों पर दर्शकों का ध्यान खींचा है। रुद्रप्रयाग के मुर्चौड़ा पालिगाड़ में 85 वर्षीय फतेराम सेमवाल को सड़क तक डंडी-कंडी से ले जाने की घटना दिखाती है कि गांव सड़क सुविधा का अब भी इंतजार कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ‘पायर’ फिल्म किस मुद्दे को सामने लाती है?
फिल्म उत्तराखंड के बुजुर्गों और पहाड़ों में पीछे छूट गए लोगों के संघर्ष को दिखाती है।
Q. मुर्चौड़ा पालिगाड़ गांव कहां है?
मुर्चौड़ा पालिगाड़ गांव रुद्रप्रयाग जिले की भरदार पट्टी में चौंडा सिराई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है।
Q. फतेराम सेमवाल की उम्र कितनी है?
फतेराम सेमवाल 85 वर्ष के हैं।
Q. उन्हें डंडी-कंडी से क्यों ले जाना पड़ा?
तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें निकटतम सड़क तक पहुंचाना था। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उन्हें पहाड़ी रास्ते से डंडी-कंडी पर ले जाया गया।
Q. ग्रामीण कितनी सड़क की मांग कर रहे हैं?
ग्रामीण करीब 2 किलोमीटर सड़क की मांग कर रहे हैं।
Q. ग्रामीणों ने सड़क के लिए क्या किया?
कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने स्वैच्छिक श्रम से रास्ता साफ किया था।
Q. प्रशासन ने सड़क को लेकर क्या कहा है?
जिलाधिकारी के अनुसार, प्रक्रिया चल रही है और वन विभाग रास्ते की अड़चनें दूर करने पर काम कर रहा है।













