पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो में टायरों और जरूरी सामग्री की कमी से बस संचालन प्रभावित हो रहा है। डिपो में हर महीने या उससे पहले टायरों की समस्या सामने आने के कारण बसें खड़ी हो रही हैं। कई रूटों पर सेवाएं नियमित नहीं चल पा रही हैं, जबकि कुछ मार्गों पर संचालन बंद बताया गया है।

डिपो को मंगलवार तक करीब 50 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत थी। इसके मुकाबले बुधवार को केवल 2 नए और 10 रबर चढ़े टायर उपलब्ध कराए गए। जरूरत और आपूर्ति के इस अंतर का असर बसों की उपलब्धता और यात्रियों को मिलने वाली सेवा पर पड़ रहा है।

टायरों की आपूर्ति में कमी से संचालन प्रभावित

टनकपुर मंडल में टायर प्लांट नहीं होने के कारण यहां के डिपो को टायरों की आपूर्ति काठगोदाम और देहरादून मंडल से होती है। मंडल के सभी डिपो नई बसों की कमी से भी जूझ रहे हैं। विभिन्न रूटों पर चल रही बसों में समय-समय पर नए और रबर चढ़े टायरों की जरूरत पड़ती है।

टायरों और दूसरी सामग्री की कमी के बीच पुरानी बसें रास्ते में खराब हो रही हैं। कर्मचारियों पर सीमित संसाधनों के बावजूद बसों को रूटों पर चलाने का दबाव बना हुआ है। गंगोलीहाट, धारचूला और अस्कोट के बस अड्डों से बसों के सुचारु संचालन के लिए कर्मचारियों की कमी भी बताई गई है।

टैंपो ट्रैवलर के मेंटेनेंस का भुगतान लंबित

पिथौरागढ़ डिपो से दिल्ली और दून रूट पर चलने वाले टैंपो ट्रैवलर के मेंटेनेंस का बकाया 4 लाख रुपये से अधिक हो गया है। मेंटेनेंस के लिए जरूरी पार्ट्स की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। अब तक किसी तरह काम चलाकर वाहन का संचालन किया जा रहा है।

मेंटेनेंस करने वाली संस्था ने प्रबंधन से कहा है कि अगले महीने से बकाया भुगतान के बिना काम करना संभव नहीं होगा। इससे इन रूटों पर चलने वाले टैंपो ट्रैवलर के संचालन को लेकर नई मुश्किल खड़ी हो सकती है।

कर्मचारियों के वेतन और रूट संचालन पर सवाल

डिपो के कर्मचारियों को 3-3 माह तक वेतन नहीं मिलने की बात सामने आई है। वेतन में देरी, सामग्री की कमी और बसों की खराब हालत के बीच सेवाओं को नियमित बनाए रखना चुनौती बन गया है। यही स्थिति रोडवेज की आय और उसके प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

उत्तराखंड परिवहन निगम के आरएम एके बनवाल ने कहा कि आउटसोर्स कर्मी भी वही काम करते हैं जो नियमित कर्मचारी करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रमोशन के पद पूरे हैं और टायर व अन्य सामग्री की आपूर्ति बराबर बनाए रखी जाती है। आरएम के अनुसार कुछ बसों के खड़े होने की स्थिति चलती रहती है।

निष्कर्ष

पिथौरागढ़ डिपो में टायरों की जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर, पुरानी बसों की खराबी, कर्मचारियों के वेतन में देरी और टैंपो ट्रैवलर के लंबित भुगतान ने रोडवेज संचालन पर असर डाला है। प्रबंधन ने आपूर्ति नियमित होने की बात कही है, लेकिन रूट सेवाओं और वाहनों के संचालन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. पिथौरागढ़ डिपो में टायरों की क्या जरूरत थी?

मंगलवार तक डिपो को करीब 50 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत थी।

Q. डिपो को कितने टायर उपलब्ध हुए?

बुधवार को डिपो को 2 नए और 10 रबर चढ़े टायर उपलब्ध हुए।

Q. टैंपो ट्रैवलर का बकाया कितना है?

दिल्ली और दून रूट पर चलने वाले टैंपो ट्रैवलर के मेंटेनेंस का बकाया 4 लाख रुपये से अधिक है।

Q. किन रूटों पर असर बताया गया है?

गंगोलीहाट, धारचूला और अस्कोट के बस अड्डों से बसों के सुचारु संचालन में कर्मचारियों की कमी बताई गई है।

Q. आरएम ने सामग्री की आपूर्ति को लेकर क्या कहा?

आरएम एके बनवाल ने कहा कि टायर और अन्य सामग्री की आपूर्ति बराबर बनाए रखी जाती है। उन्होंने कुछ बसों के खड़े होने की स्थिति बने रहने की बात भी कही।