पिथौरागढ़ के लिपुलेख दर्रे से 7 साल बाद शुरू हुआ भारत-चीन व्यापार तय समय से पहले बंद हो गया। यह कारोबार 31 अक्तूबर तक चलना था, लेकिन चीन प्रशासन के निर्देश के बाद भारतीय व्यापारियों ने 26 अक्तूबर से लौटना शुरू कर दिया। सभी भारतीय व्यापारी अब सकुशल स्वदेश लौट चुके हैं।

चीन प्रशासन ने ज्यादा बर्फबारी की आशंका और सड़क बंद होने की संभावना को व्यापार जल्द समेटने का कारण बताया। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली के मुताबिक, इसी निर्देश के कारण व्यापार तय तारीख से पहले रोकना पड़ा।

इस बार कारोबार देर से शुरू हुआ और समय से पहले खत्म हो गया। इसके चलते व्यापारियों को बड़ा लाभ नहीं मिल सका। व्यापारी महेश ह्यांकी ने कहा कि व्यापार का प्रदर्शन फीका रहा और इससे भारतीय व्यापारियों को अपेक्षित फायदा नहीं मिलेगा।

निर्यात और आयात का आंकड़ा

ट्रेड कार्यालय के अनुसार, इस सीजन में भारतीय व्यापारियों ने 74.95 लाख रुपये का सामान निर्यात किया। इसके मुकाबले 74.51 लाख रुपये के सामान का आयात हुआ।

भारत से मुख्य रूप से गुड़, चीनी और मिश्री चीन भेजी गई। चीन की तकलाकोट मंडी से भारतीय व्यापारी ऊनी कपड़े और सांबर के जूते लेकर लौटे हैं।

लिपुलेख दर्रे से व्यापार वर्ष 2019 में कोरोनाकाल के बाद बंद हो गया था। 7 साल बाद इसकी बहाली हुई, लेकिन मौसम की स्थिति के कारण इस बार कारोबार निर्धारित अवधि पूरी नहीं कर सका।

गुंजी में होगी आयातित सामान की जांच

तकलाकोट मंडी से लौटे व्यापारियों के सामान को कस्टम विभाग ने अपने अधीन ले लिया है। गुंजी में आयातित सामान की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विभाग सामान व्यापारियों को सौंपेगा। इसके बाद व्यापारी इसे लेकर धारचूला की ओर रवाना होंगे।

धारचूला के एसडीएम और ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि सभी भारतीय व्यापारी सुरक्षित लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि गुंजी में कस्टम विभाग आयातित सामान की जांच कर रहा है।

जौलजीबी मेले में बिकेगा तिब्बती सामान

14 नवंबर से ऐतिहासिक जौलजीबी मेले का आयोजन होना है। इस मेले में 6 साल बाद तिब्बती सामान दिखाई देगा। व्यापारी तिब्बती सांबर के जूते, गर्म जैकेट और चरु यानी कंबल लेकर लौटे हैं।

इन उत्पादों की बिक्री जौलजीबी मेले में की जाएगी। इससे लोगों को लंबे समय बाद तिब्बती सामान खरीदने का अवसर मिलेगा।

निष्कर्ष

लिपुलेख दर्रे का भारत-चीन व्यापार 7 साल बाद शुरू होने के बावजूद मौसम के कारण तय समय से 6 दिन पहले बंद हो गया। कम अवधि के चलते कारोबार फीका रहा। फिलहाल गुंजी में आयातित सामान की कस्टम जांच चल रही है, जबकि तिब्बती उत्पाद जौलजीबी मेले में बिक्री के लिए पहुंचेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. लिपुलेख से भारत-चीन व्यापार कब बंद हुआ?

व्यापार 31 अक्तूबर तक चलना था, लेकिन भारतीय व्यापारी 26 अक्तूबर से लौटना शुरू हो गए।

Q. व्यापार समय से पहले क्यों बंद किया गया?

चीन प्रशासन ने ज्यादा बर्फबारी और सड़क बंद होने की आशंका के कारण व्यापार जल्द बंद करने का निर्देश दिया।

Q. इस बार कितना निर्यात हुआ?

ट्रेड कार्यालय के अनुसार, 74.95 लाख रुपये के सामान का निर्यात हुआ।

Q. भारत ने इस व्यापार में क्या सामान भेजा?

भारतीय व्यापारियों ने मुख्य रूप से गुड़, चीनी और मिश्री का निर्यात किया।

Q. चीन से कौन-सा सामान आया?

आयातित सामान में ऊनी कपड़े और सांबर के जूते शामिल हैं।

Q. आयातित सामान की जांच कहां हो रही है?

गुंजी में कस्टम विभाग आयातित सामान की जांच कर रहा है।

Q. तिब्बती सामान कहां बिकेगा?

तिब्बती सामान 14 नवंबर से लगने वाले जौलजीबी मेले में बेचा जाएगा।