देहरादून में जेनी ने 2003 के मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने उत्तराखंड के नेताओं से उनके नाम पर राजनीति और आपसी आरोप-प्रत्यारोप बंद करने की अपील की। जेनी ने कहा कि इस मामले में अब तक किसी ने उनसे यह जानने की कोशिश नहीं की कि उस समय उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था।

जेनी ने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था। उसमें उन्होंने उत्तराखंड के नेताओं पर उन्हें बेवजह बदनाम करने और उनके नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इतने साल बाद भी उनके नाम का इस्तेमाल राजनीतिक विवाद में किया जा रहा है।

जेनी ने क्या कहा

जेनी ने बताया कि वह असम की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि साल 2003 के मामले को लेकर नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और उनके बारे में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। उनके अनुसार, इस पूरे विवाद में उनकी वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश नहीं की गई।

जेनी ने कहा कि उनके साथ किसने क्या किया और क्या नहीं किया, इसकी जानकारी उन्हें खुद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास इस संबंध में सबूत हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी बात सबूतों के साथ लोगों के सामने रखेंगी और उस समय की पूरी सच्चाई बताएंगी।

उन्होंने नेताओं से अपील की कि उनके नाम पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी न करें। जेनी ने लोगों से एक दिन का समय मांगा था और कहा था कि वह खुद अपनी जुबान से पूरे मामले की सच्चाई बताएंगी।

विवाद फिर राजनीतिक चर्चा में कैसे आया

जेनी प्रकरण चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड की राजनीति में फिर चर्चा में आया। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में दिए बयान के बाद हुई। पत्रकारों ने उनसे अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस की यात्राओं के बारे में सवाल किया था।

जवाब में मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि कांग्रेस को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उसके नेता खुद जेनी प्रकरण में घुसे हुए हैं। इसके बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार किया और कई बयान जारी किए।

कुछ समय बाद यह मुद्दा शांत होता दिखा, लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया। इसके बाद हरक सिंह रावत ने महेंद्र भट्ट का DNA टेस्ट कराने तक की हिदायत दी।

उपलब्ध जानकारी में जेनी की ओर से अपने दावों के समर्थन में बताए गए सबूतों का विवरण या किसी जांच की स्थिति सामने नहीं आई है। इसलिए 2003 के मामले से जुड़े आरोपों को आरोप और दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष

जेनी ने 2003 के मामले में अपने नाम के राजनीतिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। उन्होंने नेताओं से राजनीति बंद करने और खुद सामने आकर सबूतों के साथ पूरी बात रखने की बात कही है। विवाद पर अलग-अलग राजनीतिक बयान सामने आए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में मामले की जांच या किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. जेनी ने देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की?

जेनी ने 2003 के मामले में अपने नाम के इस्तेमाल और राजनीतिक बयानबाजी पर अपनी बात रखने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

Q. जेनी ने नेताओं पर क्या आरोप लगाया?

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के नेता उन्हें बेवजह बदनाम कर रहे हैं और उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं।

Q. जेनी 2003 के मामले पर क्या कह रही हैं?

उन्होंने कहा कि उस समय उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था, इसकी जानकारी उन्हें है और उनके पास इससे जुड़े सबूत हैं।

Q. जेनी ने आगे क्या करने की बात कही?

उन्होंने कहा कि वह खुद अपनी बात सबूतों के साथ लोगों के सामने रखेंगी और पूरे मामले की सच्चाई बताएंगी।

Q. यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में फिर क्यों उठा?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 24 अक्टूबर के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया। बाद में महेंद्र भट्ट के बयान और हरक सिंह रावत की प्रतिक्रिया से विवाद बढ़ा।

Q. हरक सिंह रावत ने क्या कहा?

हरक सिंह रावत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का DNA टेस्ट कराने तक की हिदायत दी।