हरिद्वार स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के होटल अलकनंदा को 90 साल की लीज पर देने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध शुरू कर दिया है। गंगा घाट पर आयोजित धरने में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए।

हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकार उत्तराखंड की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप रही है। उन्होंने कहा कि होटल अलकनंदा राज्य की मूल संपत्तियों में शामिल है और इसे इतनी लंबी अवधि की लीज पर देना प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि होटल को 90 साल की लीज पर देने से उत्तराखंड और जनता को क्या लाभ मिलेगा। रावत के मुताबिक, सरकारी संपत्तियों से राज्य और आम लोगों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। इसलिए ऐसे फैसलों में राज्य के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

हरीश रावत ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि होटल अलकनंदा केवल एक होटल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की महत्वपूर्ण संपत्ति है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के लिए प्रदेश की बहुमूल्य संपत्तियां निजी हाथों में दी जा रही हैं।

रावत ने कहा कि लंबी अवधि की लीज से राज्य अपनी संपत्ति का वास्तविक मूल्य हासिल किए बिना उस पर अपना अधिकार कमजोर कर सकता है। उन्होंने सरकार से होटल की लीज से जुड़े फैसले में पारदर्शिता बरतने और जनहित को प्राथमिकता देने की मांग की।

रानीपुर, आईडीपीएल और बागानों की जमीन का भी मुद्दा

होटल अलकनंदा के अलावा हरीश रावत ने रानीपुर, आईडीपीएल और राज्य के बहुमूल्य बागानों से जुड़ी जमीनों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन जमीनों और विश्राम गृहों को भी निजी हाथों में देने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पहले लोक निर्माण विभाग की जमीनों को निजी हाथों में देने की बात सामने आई थी। अब वन विभाग की जमीनों को लेकर भी इसी तरह की तैयारी का आरोप लगाया जा रहा है। रावत ने कहा कि राज्य की जमीन, होटल, विश्राम गृह और दूसरी सरकारी संपत्तियां जनता की धरोहर हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि सरकारी संपत्तियों को औने-पौने दामों पर या लंबी अवधि की लीज के जरिए निजी हाथों में देने का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियां इसके लिए जिम्मेदार लोगों को माफ नहीं करेंगी।

फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने होटल अलकनंदा को लीज पर देने के फैसले के खिलाफ नारेबाजी और विरोध जताया। हरीश रावत ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश की जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला है।

उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की। साथ ही कहा कि फैसला वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस अपना विरोध तेज करेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाएगी।

निष्कर्ष

होटल अलकनंदा को 90 साल की लीज पर देने का मामला उत्तराखंड में सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल और निजी हाथों में सौंपे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. होटल अलकनंदा किस संस्था से जुड़ा है?

होटल अलकनंदा गढ़वाल मंडल विकास निगम यानी जीएमवीएन से जुड़ा है।

Q. होटल अलकनंदा को कितने साल की लीज पर देने का फैसला हुआ है?

होटल अलकनंदा को 90 साल की लीज पर देने का फैसला हुआ है।

Q. कांग्रेस ने विरोध कहां किया?

कांग्रेस ने हरिद्वार में होटल अलकनंदा के गंगा घाट पर धरना देकर विरोध किया।

Q. हरीश रावत ने सरकार से क्या मांग की?

उन्होंने सरकार से होटल अलकनंदा को लीज पर देने का फैसला वापस लेने की मांग की।

Q. फैसला वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस क्या करेगी?

हरीश रावत ने कहा कि फैसला वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस विरोध तेज करेगी और आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाएगी।

Q. इस मुद्दे के साथ किन दूसरी संपत्तियों का नाम लिया गया?

हरीश रावत ने रानीपुर, आईडीपीएल, बागानों की जमीनों, विश्राम गृहों और सरकारी जमीनों का मुद्दा भी उठाया।