नैनीताल के पूर्व विधायक, राज्य आंदोलनकारी और उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का शनिवार को दिल्ली में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली में उपचार करा रहे थे। उनके निधन की सूचना से नैनीताल सहित पूरे कुमाऊं क्षेत्र में शोक का माहौल है।
डॉ. जंतवाल उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। वह उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष भी थे। पार्टी के जरिए उन्होंने उत्तराखंड की क्षेत्रीय अस्मिता, पहाड़ के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया।
वर्ष 2002 में बने थे विधायक
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने नैनीताल सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में नैनीताल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधायक के रूप में उन्होंने नैनीताल और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सड़क, सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सदन में उठाया।
राज्य गठन के बाद प्रदेश की राजनीतिक और विकास संबंधी परिस्थितियों पर भी वह अपनी राय रखते रहे। स्थायी राजधानी, मूल निवास, भू-कानून, पलायन और रोजगार जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता रही। उत्तराखंड क्रांति दल के माध्यम से वह क्षेत्रीय दलों की भूमिका और आवाज को मजबूती देने की कोशिश करते रहे।
शिक्षा और विधिक क्षेत्र से भी जुड़ाव
डॉ. जंतवाल का शिक्षा और कानून के क्षेत्र से भी संबंध रहा। उनकी शैक्षिक योग्यता एमए, एलएलबी और पीएचडी थी। वह पेशे से अधिवक्ता भी रहे। सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक गतिविधियों के साथ उन्होंने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
उनके निधन को उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति और नैनीताल के सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके राजनीतिक जीवन में पहाड़ के विकास, स्थानीय पहचान और लोगों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
निष्कर्ष
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का निधन उत्तराखंड क्रांति दल और नैनीताल के सार्वजनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण क्षति है। वर्ष 2002 में विधायक चुने गए जंतवाल ने क्षेत्रीय अस्मिता, पहाड़ के विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंच पर उठाया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. डॉ. नारायण सिंह जंतवाल कौन थे?
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल नैनीताल के पूर्व विधायक, राज्य आंदोलनकारी और उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता थे। वह पार्टी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे।
Q. डॉ. जंतवाल का निधन कब हुआ?
उनका निधन शनिवार को हुआ। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे और दिल्ली में उपचार करा रहे थे।
Q. वह किस विधानसभा सीट से विधायक बने थे?
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में वह नैनीताल सीट से विधायक चुने गए थे।
Q. डॉ. जंतवाल ने किन मुद्दों को उठाया?
उन्होंने क्षेत्रीय अस्मिता, पहाड़ के विकास, स्थायी राजधानी, मूल निवास, भू-कानून, पलायन और रोजगार जैसे मुद्दे उठाए।
Q. उनका पेशा क्या था?
डॉ. जंतवाल पेशे से अधिवक्ता थे। उनकी शैक्षिक योग्यता एमए, एलएलबी और पीएचडी थी।









