मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विकास कार्यों को सरकार की प्राथमिकता बताया। वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने गोरखा समाज की वीरता, राष्ट्रभक्ति और उत्तराखंड के विकास में योगदान का उल्लेख किया।
धामी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा वीरों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने गोरखा समाज के इतिहास को त्याग, बलिदान और साहस की मिसाल बताया। मुख्यमंत्री ने समाज के आदर्श वाक्य ‘कायर हुनुभन्दा मर्नु राम्रो’ का अर्थ कायर बनकर जीने से बेहतर वीरता के साथ प्राण न्योछावर करना बताया।
भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने नेपाली भाषा और गोरखा समाज की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने से जुड़े कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चल रहे हैं।
नेपाली भाषा और साहित्य को संस्थागत प्रोत्साहन देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल की गई है। धामी ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखना है।
सीमा पर व्यापार और आवाजाही के लिए योजनाएं
धामी ने भारत और नेपाल के रिश्तों को सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों से जोड़ा। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता बताते हुए सीमांत इलाकों में सड़क, पुल और व्यापारिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।
सरकार की ओर से बताई गई प्रमुख योजनाओं में बनबसा में 368.28 करोड़ रुपए की लागत से बन रही इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट शामिल है। इसके साथ ही बनबसा के सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने की तैयारी है।
सितारगंज-टनकपुर मार्ग से बनबसा सीमा तक 246.86 करोड़ रुपए की लागत से फोरलेन कनेक्टिविटी का काम प्रस्तावित है। इससे सीमा क्षेत्र तक पहुंच और वहां की व्यापारिक गतिविधियों के लिए सड़क संपर्क बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
धारचूला के छारछुम में पुल के जरिए भारत और नेपाल के बीच आवाजाही तथा व्यापारिक संपर्क मजबूत करने की योजना भी बताई गई। महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना से बिजली उत्पादन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
इन योजनाओं के जरिए सीमांत क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और व्यापारिक सुविधाओं से जोड़ने का संदेश दिया गया। बनबसा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और ड्राई पोर्ट की तैयारी का संबंध सीमा पर आने-जाने तथा व्यापार से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार से है।
महिलाओं के लिए सरकार के कदमों का उल्लेख
महिला सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिए जाने की बात भी कही।
धामी ने समान नागरिक संहिता को महिलाओं को समान अधिकार और न्याय देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार गोरखा समाज के सम्मान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारी, गोरखा समाज के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
निष्कर्ष
गोरखा महोत्सव में मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक संरक्षण के साथ सीमांत विकास को भी केंद्र में रखा। बनबसा, धारचूला और भारत-नेपाल सीमा से जुड़ी सड़क, पुल, चेक पोस्ट और व्यापारिक योजनाओं के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ाने का लक्ष्य बताया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह बातें किस कार्यक्रम में कहीं?
उन्होंने देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेले में यह बातें कहीं।
Q. बनबसा में कौन-सी योजना बनाई जा रही है?
बनबसा में 368.28 करोड़ रुपए की लागत से इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का निर्माण हो रहा है।
Q. भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार बढ़ाने के लिए और क्या तैयारी है?
बनबसा के सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने और सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी है।
Q. नेपाली भाषा के संरक्षण के लिए क्या कदम बताए गए?
हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चल रहे हैं। नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल भी की गई है।
Q. छारछुम पुल योजना का उद्देश्य क्या है?
धारचूला के छारछुम में पुल के जरिए भारत और नेपाल के बीच आवाजाही तथा व्यापारिक संपर्क बेहतर करने की योजना है।
Q. पंचेश्वर परियोजना से क्या लक्ष्य जुड़ा है?
महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना से बिजली उत्पादन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।










