सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद देहरादून में आवासीय नक्शे पर चल रही दुकानों को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। खासकर उन दुकानदारों में असमंजस है, जो व्यावसायिक मार्गों पर कारोबार कर रहे हैं, लेकिन उनके भवनों के स्वीकृत नक्शे में उपयोग आवासीय दर्ज है। व्यापारियों को डर है कि सर्वे और चिह्नीकरण के बाद उनके कारोबार पर संकट आ सकता है।

दून उद्योग व्यापार मंडल की कोर कमेटी ने रविवार को वर्चुअल बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की। संगठन ने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। व्यापार मंडल का कहना है कि न्यायालय के आदेश का सम्मान जरूरी है, लेकिन कार्रवाई से पहले प्रभावित व्यापारियों की स्थिति, रोजगार और व्यावहारिक समस्याओं पर भी विचार होना चाहिए।

व्यापार मंडल के अनुसार, लंबे समय से चल रही दुकानों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके भवनों का स्वीकृत नक्शा आवासीय श्रेणी में है। संगठन को जानकारी मिली है कि सर्वे केवल आवासीय कॉलोनियों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यावसायिक मार्गों पर स्थित ऐसी दुकानों को भी चिह्नित किया जा सकता है। इससे व्यापारियों में असमंजस और डर का माहौल है।

दुकानदारों को कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं

दुकानदारों के सामने यह सवाल है कि मौजूदा व्यापारिक उपयोग नियमों के अनुरूप माना जाएगा या नहीं। कार्रवाई होने की स्थिति में दुकानें बंद होने और कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापार मंडल ने मांग की है कि प्रभावित दुकानदारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं और किसी भी कार्रवाई से पहले व्यावहारिक समाधान तलाशा जाए।

संगठन का कहना है कि इस मामले का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। कारोबार से जुड़े कर्मचारियों और व्यापारियों के परिवारों की आय भी प्रभावित हो सकती है। व्यापार मंडल ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे न्यायालय के आदेशों का पालन भी हो और व्यापारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर भी मिले।

त्योहारों के कारोबार पर असर की आशंका

व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो आगामी त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। संगठन के अनुसार, अचानक कार्रवाई होने पर दुकानों के बंद होने, रोजगार पर असर पड़ने और परिवारों की आय प्रभावित होने की आशंका है।

दून उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी वर्ग कानून और न्यायपालिका का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यापारियों की आजीविका और उनके परिवारों के भविष्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद से अनेक आवासीय क्षेत्रों और कॉलोनियों में छोटी-बड़ी दुकानें संचालित होती रही हैं। ये दुकानें स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करती हैं।

सोमवार को अधिकारियों से मुलाकात

कोर कमेटी ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर व्यापारियों की समस्याएं उठाने का फैसला किया है। संगठन तत्काल हस्तक्षेप और प्रभावित दुकानदारों को राहत देने की मांग रखेगा।

व्यापार मंडल ने कहा है कि बातचीत के बाद भी राहत नहीं मिली तो आंदोलन तेज किया जा सकता है। इसके लिए अन्य व्यापारी संगठनों के साथ समन्वय किया जाएगा। संगठन ने प्रदेश और देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही है।

बैठक में संरक्षक अनिल गोयल, अध्यक्ष विपिन नागलिया, कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल, महामंत्री सुनील मैंसोन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डी.डी. अरोड़ा, कोषाध्यक्ष कमलेश अग्रवाल सहित कोर कमेटी के सदस्य और विभिन्न क्षेत्रीय व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

निष्कर्ष

देहरादून के व्यापारी आवासीय नक्शे पर चल रही दुकानों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और व्यावहारिक समाधान चाहते हैं। व्यापार मंडल सोमवार को अधिकारियों के सामने मुद्दा रखेगा। राहत नहीं मिलने पर संगठन ने आंदोलन और व्यापक हड़ताल जैसे विकल्पों पर विचार करने की चेतावनी दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. देहरादून के व्यापारी किस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं?

आवासीय श्रेणी में स्वीकृत नक्शे वाले भवनों में चल रही दुकानों के सर्वे और चिह्नीकरण को लेकर व्यापारी चिंतित हैं।

Q. व्यापारियों को किस कार्रवाई का डर है?

उन्हें आशंका है कि सर्वे और चिह्नीकरण के बाद कुछ दुकानों पर कार्रवाई हो सकती है और कारोबार प्रभावित हो सकता है।

Q. इस मुद्दे पर किस संगठन ने बैठक की?

दून उद्योग व्यापार मंडल की कोर कमेटी ने रविवार को वर्चुअल बैठक की।

Q. व्यापार मंडल ने सरकार और प्रशासन से क्या मांग की है?

संगठन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश देने, तत्काल हस्तक्षेप करने और कार्रवाई से पहले व्यावहारिक समाधान तलाशने की मांग की है।

Q. अधिकारियों से व्यापारी कब मिलेंगे?

दून उद्योग व्यापार मंडल ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने का फैसला किया है।

Q. राहत नहीं मिलने पर व्यापार मंडल क्या कर सकता है?

संगठन अन्य व्यापारी संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन तेज करने और प्रदेश व देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है।