देहरादून के मोहब्बेवाला ढलान पर ट्रकों से लगातार हादसे हो रहे हैं। इस साल अब तक 15 दुर्घटनाओं में 6 लोग जान गंवा चुके हैं। हादसों के बीच विभागों की ओर से किए गए सर्वे और सुरक्षा उपायों के बावजूद कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डाट काली टनल से मोहब्बेवाला के बीच सड़क की स्थिति और हादसों के कारणों का सर्वे कराने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) को लगाया है। सीआरआरआई ने सर्वे रिपोर्ट देने के लिए प्राधिकरण से 2 महीने का समय मांगा है।

परिवहन विभाग ने भी जेपीआरआई संस्था को सर्वे की जिम्मेदारी दी थी। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में सर्वे रिपोर्ट आने तक हादसे रोकने के लिए किए जाने वाले तत्काल इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हादसे रोकने की जिम्मेदारी पर भी असमंजस

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के अनुसार, कुछ दिन पहले इस मार्ग का तीसरे पक्ष से ऑडिट कराया गया था। ऑडिट करने वाली संस्था ने सड़क के डिजाइन को दुरुस्त बताया था। इसके बाद हादसे रोकने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करने की बात सामने आई।

ऑडिट रिपोर्ट में पुलिस की तैनाती बढ़ाने और प्रवर्तन तेज करने की सिफारिश की गई थी। इसके पीछे उद्देश्य वाहनों की गति और सड़क पर नियमों के पालन पर नियंत्रण बढ़ाना था। हालांकि, लगातार हो रहे हादसों के बीच अधिकारी भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि मौजूदा उपायों के अलावा क्या किया जाए।

नए और पुराने मार्ग में क्या अंतर बताया गया

पुराने मार्ग में सड़क का ढाल कम था और वाहनों की गति चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित रहती थी। वहां गति करीब 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा रहती थी। सड़क की बनावट काफी घुमावदार थी और 5 मोड़ प्राकृतिक गति नियंत्रक की तरह काम करते थे। इससे ब्रेक को ठंडा होने का समय मिलता था और ब्रेक ओवरहीटिंग का जोखिम बहुत कम रहता था।

पुराने मार्ग पर दुर्घटनाओं का मुख्य कारण संकीर्ण सड़क और ओवरटेकिंग की कोशिश बताया गया है। इसके विपरीत, नए मार्ग में लगातार और तेज ढलान है। इस वजह से वाहनों की गति 80 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच जाती है।

नया मार्ग सीधा और चौड़ा है, जिससे तेज गति को बढ़ावा मिलता है। लगातार ढलान के कारण ब्रेक ओवरहीटिंग का जोखिम बहुत ज्यादा बताया गया है। दुर्घटनाओं का मुख्य कारण ब्रेक फेलियर और वाहन का अनियंत्रित होना माना गया है।

बोर्ड और जिग-जैग बैरियर के बाद भी हादसे जारी

हादसे रोकने के लिए मार्ग पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। जिग-जैग बैरियर भी स्थापित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दुर्घटनाएं रुक नहीं रही हैं। अधिकारियों के सामने अब ऐसे उपाय तलाशने की चुनौती है, जिनसे वाहनों की गति और ढलान से पैदा होने वाले खतरे को नियंत्रित किया जा सके।

परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि किसी भी एजेंसी ने डिजाइन में खामी नहीं बताई है। उनके अनुसार, कई एजेंसियों की सिफारिशों पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे क्यों हो रहे हैं, इस पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

अधिकारी के मुताबिक, अब तक किए गए उपायों से अलग कोई और कदम बड़ी इंजीनियरिंग के बिना संभव नहीं है। ऐसे में जेपीआरआई की तैयार रिपोर्ट और सीआरआरआई के आगामी सर्वे से मार्ग की सुरक्षा को लेकर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

मोहब्बेवाला ढलान पर इस साल 15 हादसों में 6 मौतें हो चुकी हैं। सुरक्षा बोर्ड और जिग-जैग बैरियर के बावजूद दुर्घटनाएं जारी हैं। जेपीआरआई की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, जबकि सीआरआरआई ने सर्वे रिपोर्ट के लिए 2 महीने का समय मांगा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मोहब्बेवाला ढलान पर कितने हादसे हुए हैं?

इस साल अब तक यहां 15 हादसे हुए हैं।

Q. इन हादसों में कितने लोगों की मौत हुई है?

15 हादसों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है।

Q. सीआरआरआई को किस मार्ग का सर्वे सौंपा गया है?

सीआरआरआई को डाट काली टनल से मोहब्बेवाला के बीच सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है।

Q. जेपीआरआई की रिपोर्ट की स्थिति क्या है?

जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन उसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

Q. हादसे रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?

मार्ग पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और जिग-जैग बैरियर स्थापित किए गए हैं।

Q. ऑडिट में सड़क के डिजाइन के बारे में क्या कहा गया?

तीसरे पक्ष से कराए गए ऑडिट में सड़क के डिजाइन को दुरुस्त बताया गया था।