देहरादून में 6 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को इलाज और मेडिकल जांच के लिए 2 अस्पतालों के बीच भेजे जाने के मामले में जांच शुरू हो गई है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने कोरोनेशन अस्पताल और दून मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों के बयान और रिपोर्ट मांगी है।
यह कार्रवाई सचिव विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर शुरू हुई। कोरोनेशन अस्पताल के पीएमएस डॉ. यतेंद्र सिंह तथा दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन और एमएस डॉ. आरएस बिष्ट से कलमबंद बयान लिए जा रहे हैं। निदेशालय को रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।
डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में इलाज और मेडिकल जांच में देरी दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, दोनों अस्पतालों से रिपोर्ट तलब की गई है और रिपोर्ट में जो दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शासन ने मामले पर नाराजगी जताई है।
रात में करीब 6 घंटे अस्पतालों के बीच भटकते रहे
पटेलनगर क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद पुलिस और परिजन रात 11 बजे मेडिकल जांच के लिए कोरोनेशन अस्पताल पहुंचे थे। वहां पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर बच्ची को दून अस्पताल रेफर किया गया।
दून अस्पताल में भी प्रक्रिया पूरी किए बिना बच्ची को वापस कोरोनेशन भेजे जाने की बात सामने आई है। इस दौरान बच्ची और उसके परिजन करीब 6 घंटे तक अस्पतालों के बीच भटकते रहे। बाद में मामला शासन तक पहुंचा और दोनों अस्पतालों की भूमिका पर सवाल उठे।
दोनों अस्पतालों के अधिकारियों ने दी अलग-अलग वजह
कोरोनेशन अस्पताल के पीएमएस डॉ. यतेंद्र सिंह ने कहा कि पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बच्ची को रेफर किया गया था।
दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने जांच की थी। उन्होंने कहा कि परिजन एनेस्थीसिया के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए सामान्य जांच रिपोर्ट लिखकर बच्ची को वापस भेजा गया। इन दावों की जांच रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
अस्पतालों से रोजाना रिपोर्ट भेजने के निर्देश
निदेशालय ने दोनों अस्पतालों को भर्ती और रेफर किए गए मरीजों की रिपोर्ट रोजाना शाम को भेजने के निर्देश दिए हैं। यह रिपोर्ट निदेशालय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी जाएगी, जिसके बाद निदेशालय शासन को जानकारी देगा।
इसके अलावा मेडिकोलीगल और सड़क हादसे से जुड़े मामलों को मेडलिपर पोर्टल पर 24 घंटे के भीतर दर्ज करने को कहा गया है। यह निर्देश ऐसे मामलों में रिकॉर्ड और रेफरल की निगरानी से जुड़ा है।
राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग में शिकायत
वरिष्ठ मानवाधिकार और आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने मामले में राज्यपाल, मुख्य सचिव और मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी है। उन्होंने मामले की सघन जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शासन के स्तर पर अब दोनों अस्पतालों से मिली रिपोर्ट और डॉक्टरों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। स्रोत में करीब 7 डॉक्टरों से पूछताछ की संभावना का उल्लेख है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
6 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को रात में 2 अस्पतालों के बीच भेजे जाने के मामले में चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने जांच शुरू कर दी है। दोनों अस्पतालों से रिपोर्ट और डॉक्टरों के बयान मांगे गए हैं। शासन ने दोष मिलने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. इस मामले की जांच किसने शुरू की है?
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने सचिव विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर जांच शुरू की है।
Q. किन अस्पतालों से रिपोर्ट मांगी गई है?
कोरोनेशन अस्पताल और दून मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों के बयान और रिपोर्ट मांगी गई है।
Q. बच्ची को अस्पतालों के बीच क्यों भेजा गया था?
कोरोनेशन अस्पताल ने पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं होने की बात कहकर रेफर किया था। दून अस्पताल ने परिजनों के एनेस्थीसिया के लिए तैयार नहीं होने का तर्क दिया है।
Q. बच्ची और उसके परिजन कितनी देर तक भटकते रहे?
वे रात में करीब 6 घंटे तक दोनों अस्पतालों के बीच भटकते रहे।
Q. मामले में शिकायत कहां की गई है?
मानवाधिकार और आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने राज्यपाल, मुख्य सचिव और मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है।
Q. जांच के बाद क्या कार्रवाई होगी?
चिकित्सा शिक्षा निदेशक के अनुसार, रिपोर्ट में जो दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।










