मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 नवंबर को शासकीय आवास से ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेश के लगभग 8 लाख स्कूली बच्चों से वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों से त्योहारों को सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से मनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों से लगातार जुड़ाव बनाए रखना, उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देना और शिक्षा, संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा जीवन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देना है। आधुनिक तकनीक के जरिए दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर प्रदेश के शहरों और गांवों में पढ़ने वाले बच्चे एक साथ कार्यक्रम से जुड़े।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने उनके परिवार का हालचाल पूछा और दीपावली की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव का अवसर नहीं होते, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने का माध्यम भी हैं। इन पर्वों से आपसी प्रेम, सहयोग और पारिवारिक संबंधों का महत्व समझ में आता है।

स्वच्छता और स्थानीय उत्पादों पर जोर

मुख्यमंत्री ने बच्चों से दीपावली पर घर की साफ-सफाई में परिवार का सहयोग करने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छता को रोजमर्रा की आदत बनाना जरूरी है। उनके अनुसार, लोगों की छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर प्रदेश और देश को स्वच्छ बनाने में मदद कर सकती हैं।

उन्होंने बच्चों को मिट्टी के दीये जलाने और स्थानीय कुम्हारों तथा कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय वस्तुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे कारीगरों की आजीविका और उनके परिवारों की खुशियों को सहारा मिलेगा।

पटाखों से दूरी और बड़ों की निगरानी की अपील

त्योहारों के दौरान सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बच्चों से पटाखों से दूर रहने को कहा। उन्होंने दीये और फुलझड़ियां जलाते समय बड़ों की निगरानी में रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों का आनंद तभी है, जब लोग अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और नई चीजें सीखने में रुचि लेने को कहा। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए मेहनत, अनुशासन और लगातार सीखने की भावना जरूरी है।

एआई और डिजिटल तकनीक से कार्यक्रम को बेहतर बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम को आगे एआई और डिजिटल तकनीक की मदद से अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने निबंध के जरिए हुए संवाद कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के विकास पर अपने विचार और सुझाव साझा किए थे।

उन्होंने कहा कि बच्चों के विचारों और सुझावों का विशेष महत्व है। उपयोगी सुझावों को भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में ध्यान में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को ‘विकल्प रहित संकल्प’ का अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि इसका मतलब लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना है।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से खूब पढ़ने, खेलने और नई चीजें सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत और रचनात्मक सोच विकसित उत्तराखण्ड और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देगी।

कार्यक्रम में सचिव शिक्षा ज्योति यादव, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे और संयुक्त निदेशक गोविन्द राम जायसवाल मौजूद रहे।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लगभग 8 लाख स्कूली बच्चों से संवाद करते हुए त्योहारों में स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों और सुरक्षा पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पढ़ाई, अनुशासन, रचनात्मकता और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता को बच्चों की प्रगति का आधार बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मुख्यमंत्री ने किस कार्यक्रम के जरिए बच्चों से संवाद किया?

मुख्यमंत्री ने ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को संबोधित किया।

Q. कार्यक्रम में कितने स्कूली बच्चे जुड़े?

कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 8 लाख स्कूली बच्चे वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

Q. मुख्यमंत्री ने दीपावली पर बच्चों को क्या संदेश दिया?

उन्होंने बच्चों से स्वच्छता का ध्यान रखने, पटाखों से दूर रहने और दीये व फुलझड़ियां बड़ों की निगरानी में जलाने को कहा।

Q. स्थानीय उत्पादों को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या अपील की?

उन्होंने मिट्टी के दीये और स्थानीय कुम्हारों तथा कारीगरों के बनाए उत्पाद अपनाने की अपील की।

Q. कार्यक्रम को आगे किस तकनीक से बेहतर बनाया जाएगा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम को एआई और डिजिटल तकनीक की मदद से अधिक उपयोगी बनाया जाएगा।