अल्मोड़ा जिले के बग्वालीपोखर की 12 वर्षीय बच्ची को गंभीर हालत में अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से हल्द्वानी रेफर किया गया। बच्ची के परिजनों के अनुसार, अल्मोड़ा में एबी नेगेटिव रक्त की व्यवस्था करने के बाद भी उसे देर रात हायर सेंटर भेज दिया गया। हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में उसका सफल ऑपरेशन हुआ और वहां रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी।

बुधवार को जगदीश राम की बेटी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। परिजन उसे पहले रानीखेत के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। बेहतर और सरकारी इलाज की उम्मीद में परिजन बच्ची को रात ढाई बजे सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे।

बच्ची के चाचा जीवन राम के मुताबिक, अल्मोड़ा में डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए एबी नेगेटिव रक्त की व्यवस्था करने को कहा। यह दुर्लभ रक्त समूह होने के कारण परिजन रातभर इसकी तलाश करते रहे। उनके अनुसार, ब्लड बैंक ने रक्त उपलब्ध नहीं होने की बात कही।

रेडक्रॉस ने रात में जुटाया रक्तदाता

मामले की जानकारी मिलने पर यूथ रेडक्रॉस की टीम सक्रिय हुई। रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने एबी नेगेटिव रक्तदाता की व्यवस्था की और उसे लेकर रात में मेडिकल कॉलेज पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि रक्तदाता अस्पताल पहुंचा, उससे पहले ही डॉक्टरों ने बच्ची को हायर सेंटर रेफर कर दिया।

परिजनों ने 3,800 रुपये में निजी एंबुलेंस बुक की और बच्ची को रात में हल्द्वानी ले गए। जीवन राम के अनुसार, निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों ने बच्ची का ऑपरेशन किया। वहां उसे रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसी आधार पर परिजनों ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में किए गए इलाज और रेफर करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

रेडक्रॉस ने कार्रवाई की मांग की

घटना के बाद रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ब्लड बैंक की व्यवस्था और डॉक्टरों के फैसले पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने कहा कि पहाड़ी और दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों के लिए रात में हायर सेंटर जाना जोखिम भरा होता है। उन्होंने व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। प्राचार्य से मिलने वालों में रेडक्रॉस के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, यूथ रेडक्रॉस चेयरमैन अमित साह मोनू, सचिव मनोज भंडारी मंटू, उपसचिव अभिषेक जोशी और ग्राम प्रधान विनोद जोशी शामिल रहे।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने क्या कहा

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएस तितियाल ने कहा कि बच्ची पेट से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण अस्पताल आई थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद तत्काल ऑपरेशन की जरूरत बताई और आपात स्थिति में 2 यूनिट एबी नेगेटिव रक्त मांगा।

प्राचार्य के अनुसार, उस समय ब्लड बैंक में यह दुर्लभ रक्त समूह उपलब्ध नहीं था। बच्ची का पेट दर्द लगातार बढ़ रहा था और किसी अप्रिय स्थिति की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर और तत्काल इलाज के लिए उसे हायर सेंटर रेफर करने का फैसला लिया।

निष्कर्ष

इस मामले में परिजनों ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की रक्त और रेफरल व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्राचार्य ने रक्त उपलब्ध नहीं होने और बच्ची की बिगड़ती हालत को रेफर करने का कारण बताया है। हल्द्वानी में बिना रक्त चढ़ाए ऑपरेशन होने की जानकारी के बाद विवाद और गहरा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. बच्ची को किस अस्पताल से रेफर किया गया?

बच्ची को सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से हल्द्वानी रेफर किया गया।

Q. बच्ची को किस रक्त समूह की जरूरत बताई गई थी?

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में एबी नेगेटिव रक्त की जरूरत बताई गई थी।

Q. रक्त की कितनी यूनिट मांगी गई थी?

प्राचार्य के अनुसार, आपात स्थिति में 2 यूनिट एबी नेगेटिव रक्त मांगा गया था।

Q. क्या रक्तदाता की व्यवस्था हुई थी?

परिजनों के अनुसार, यूथ रेडक्रॉस की टीम ने एबी नेगेटिव रक्तदाता की व्यवस्था की थी।

Q. बच्ची का ऑपरेशन कहां हुआ?

बच्ची का सफल ऑपरेशन हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में हुआ।

Q. क्या हल्द्वानी में बच्ची को रक्त चढ़ाया गया?

परिजनों के अनुसार, हल्द्वानी के निजी अस्पताल में बच्ची को रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी।

Q. रेडक्रॉस ने क्या मांग की है?

रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने प्राचार्य को ज्ञापन देकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।

Q. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने रेफर करने की क्या वजह बताई?

डॉ. जीएस तितियाल ने रक्त उपलब्ध नहीं होने और बच्ची का दर्द बढ़ने के कारण तत्काल बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की बात कही।