उत्तराखंड में बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा Airbus H125 हेलिकॉप्टर शुक्रवार को जोशीमठ के पास चाई गांव में क्रैश हो गया। हादसे में एक पायलट और 5 यात्रियों की मौत हो गई। उपलब्ध जानकारी में दुर्घटना की वजह का उल्लेख नहीं है।
यह हेलिकॉप्टर AS350 परिवार का हिस्सा है। इसी परिवार के पूर्ववर्ती मॉडल Eurocopter AS350 B3 ने 14 मई 2005 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर उतरने और फिर उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया था। उस समय कंपनी का नाम Eurocopter था। बाद में इसे Airbus Helicopters के नाम से जाना गया।
AS350 B3e मॉडल को बाद में H125 नाम दिया गया। यह हेलिकॉप्टर ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है। हिमालय जैसे क्षेत्रों में, जहां सामान्य परिवहन साधनों से पहुंचना मुश्किल होता है, हेलिकॉप्टर यात्रियों और जरूरी सेवाओं के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।
H125 की क्षमता और इस्तेमाल
Airbus के मुताबिक H125 में एक पायलट के साथ अधिकतम 6 यात्री बैठ सकते हैं। इस हिसाब से इसकी कुल क्षमता 7 लोगों की हो सकती है। हालांकि किसी उड़ान में यात्रियों की वास्तविक संख्या परिस्थितियों और हेलिकॉप्टर के कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करती है।
इस हेलिकॉप्टर की अधिकतम क्रूज स्पीड 136 नॉट यानी करीब 252 किलोमीटर प्रति घंटा है। निर्धारित परिस्थितियों में इसका अधिकतम टेकऑफ वजन और करीब 630 किलोमीटर की रेंज बताई गई है।
H125 का इस्तेमाल यात्री परिवहन के अलावा पर्यटन, हवाई सर्वेक्षण, आपदा राहत, बचाव अभियान, मेडिकल इमरजेंसी और पुलिस ऑपरेशन में किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार इसके उपकरण और केबिन की व्यवस्था बदली जा सकती है।
कॉकपिट और फ्लाइट डेटा सिस्टम
H125 में टचस्क्रीन ग्लास कॉकपिट इंस्ट्रूमेंट पैनल दिया गया है। इसका उद्देश्य पायलटों का काम आसान करना और उनके काम का बोझ कम करना है। इसमें Garmin G500H TXi एवियोनिक्स सूट और Airbus के लिए विकसित Vehicle and Engine Multifunction Display यानी VEMD शामिल हैं।
VEMD की मदद से पायलट मुख्य व्हीकल और इंजन पैरामीटर एक नजर में देख सकते हैं। हेलिकॉप्टर में दिया गया वायरलेस कनेक्शन हर उड़ान पूरी होने के बाद फ्लाइट डेटा अपने आप ट्रांसफर कर देता है।
भारत में निर्माण की तैयारी
Airbus और Tata Advanced Systems ने कर्नाटक के वेमागल में H125 की फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की है। इसका उद्घाटन 17 फरवरी 2026 को हुआ था। यहां बनने वाले पहले मेड इन इंडिया H125 हेलिकॉप्टर की डिलीवरी 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है।
इस परियोजना को भारत में हेलिकॉप्टर निर्माण, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
जोशीमठ के पास चाई गांव में हुआ हादसा Airbus H125 हेलिकॉप्टर से जुड़ा है और इसमें पायलट समेत 6 लोगों की मौत हुई। यह मॉडल कठिन पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। दुर्घटना के कारण और जांच की अगली कार्रवाई की जानकारी की जानकारी अभी नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. उत्तराखंड में कौन सा हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ?
Airbus H125 हेलिकॉप्टर बद्रीनाथ से देहरादून जाते समय जोशीमठ के पास चाई गांव में क्रैश हुआ।
Q. हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
हादसे में एक पायलट और 5 यात्रियों की मौत हुई।
Q. H125 हेलिकॉप्टर में कितने लोग बैठ सकते हैं?
Airbus के मुताबिक इसमें एक पायलट के साथ अधिकतम 6 यात्री बैठ सकते हैं।
Q. H125 की अधिकतम क्रूज स्पीड कितनी है?
इसकी अधिकतम क्रूज स्पीड 136 नॉट यानी करीब 252 किलोमीटर प्रति घंटा है।
Q. H125 का इस्तेमाल किन कामों में होता है?
इसका इस्तेमाल यात्री परिवहन, पर्यटन, हवाई सर्वेक्षण, आपदा राहत, बचाव, मेडिकल इमरजेंसी और पुलिस ऑपरेशन में किया जा सकता है।
Q. H125 का संबंध किस हेलिकॉप्टर परिवार से है?
H125, AS350 हेलिकॉप्टर परिवार का हिस्सा है। इसी परिवार के AS350 B3 मॉडल ने माउंट एवरेस्ट पर उतरने और उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया था।
Q. भारत में H125 का निर्माण कहां होगा?
Airbus और Tata Advanced Systems ने कर्नाटक के वेमागल में इसकी फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की है।











