श्री हेमकुण्ड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। साल की अंतिम अरदास के दौरान सेना के बैंड की गूंज और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय रहा।

चमोली पुलिस की साझा जानकारी के अनुसार, कपाट बंद होने के इस ऐतिहासिक पल के साक्षी हजारों श्रद्धालु बने। अंतिम अरदास के दौरान कई श्रद्धालु भावुक नजर आए और उनकी आंखें नम रहीं।

इस सीजन में श्री हेमकुण्ड साहिब में 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह संख्या इस धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी मौजूदगी को दर्शाती है।

अंतिम अरदास में उमड़ी श्रद्धा

कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालु अंतिम अरदास में शामिल हुए। सेना के बैंड की धुन और लगातार लग रहे ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।

कपाट बंद होने के साथ श्री हेमकुण्ड साहिब की इस साल की यात्रा का समापन हो गया। अब कपाट शीतकाल के लिए बंद रहेंगे।

निष्कर्ष

श्री हेमकुण्ड साहिब के कपाट अंतिम अरदास के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस सीजन में 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और हजारों लोग समापन के ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. श्री हेमकुण्ड साहिब के कपाट कब बंद हुए?

श्री हेमकुण्ड साहिब के कपाट साल की अंतिम अरदास के बाद शीतकाल के लिए बंद हुए।

Q. इस सीजन में कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए?

इस सीजन में 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री हेमकुण्ड साहिब में दर्शन किए।

Q. कपाट बंद होने के दौरान क्या कार्यक्रम हुआ?

कपाट बंद होने से पहले साल की अंतिम अरदास हुई। इस दौरान सेना के बैंड की धुन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारे सुनाई दिए।

Q. कपाट बंद होने के समय माहौल कैसा था?

माहौल भक्तिमय और भावुक रहा। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

Q. अब श्री हेमकुण्ड साहिब की स्थिति क्या है?

कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।