उत्तराखंड की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में एस्केप सुरंग-1 का काम पूरा हो गया है। इसकी पूरी 10.847 किलोमीटर लंबाई में आरपार जुड़ाव हो गया है। इसके बाद यह भारतीय रेलवे की दूसरी सबसे लंबी सुरंग बन गई है।
यह 125 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना ऋषिकेश के योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को गढ़वाल क्षेत्र के कर्णप्रयाग शहर से जोड़ेगी। पर्वतीय क्षेत्र में रेल संपर्क बढ़ाने वाली इस योजना में सुरंग निर्माण को सबसे चुनौतीपूर्ण कामों में गिना जा रहा है।
निर्माण के दौरान सामने आईं मुश्किलें
रेलवे के मुताबिक, सुरंग का रास्ता हिमालय की जटिल भूगर्भीय संरचना से होकर गुजरता है। यहां अत्यधिक चट्टानी क्षेत्र, मुड़ी हुई परतें, बड़े भ्रंश और कई जगह गहरी दरारें मिलीं। कुछ हिस्सों में चट्टानों के खिसकने और टूट-फूट की स्थिति भी थी।
मेन बाउंड्री थ्रस्ट के आसपास मोटे माइलोनाइट जोन मिलने से खुदाई का काम और कठिन हुआ। ऐसी परिस्थितियों के बीच अंतिम ब्रेकथ्रू पूरा होना परियोजना से जुड़े कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता, टीमवर्क और लगातार प्रयास का नतीजा बताया गया है।
अगले एक साल में 5 और ब्रेकथ्रू की उम्मीद
रेलवे ने बताया कि परियोजना अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। बचे हुए 5 ब्रेकथ्रू अगले एक वर्ष के भीतर पूरे होने की उम्मीद है। इससे ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच रेल संपर्क तैयार करने का काम आगे बढ़ेगा।
परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा के अनुसार, ढालवाला से नीर गड्डू तक जाने वाली करीब 10 किलोमीटर लंबी निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि निर्माण काम तकनीकी मानकों और जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ जारी है।
परियोजना को तेजी देने के लिए करीब एक हजार कर्मचारी 24 घंटे काम कर रहे हैं। रेलवे के अनुसार, इस उपलब्धि से हिमालयी क्षेत्र को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में एक और अहम कदम पूरा हुआ है।
परियोजना में सुरंगों की स्थिति
उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि 125 किलोमीटर की परियोजना में 28 सुरंगें शामिल हैं। उनके अनुसार, रेल विकास निगम लिमिटेड अब तक 22 सुरंगों का निर्माण पूरा कर चुका है। रेलवे ने अलग से बताया है कि परियोजना में कुल 41 सुरंगों का निर्माण कार्य हो चुका है।
देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग जम्मू-कश्मीर की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के कटरा-बनिहाल खंड में है। खारी और बनिहाल स्टेशनों के बीच बनी सुरंग-49 की लंबाई 12.895 किमी है।
निष्कर्ष
एस्केप सुरंग-1 का ब्रेकथ्रू ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। अब अगले एक वर्ष में 5 और ब्रेकथ्रू पूरे होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना की लंबाई कितनी है?
यह रेल परियोजना 125 किलोमीटर लंबी है। यह योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी।
Q. एस्केप सुरंग-1 की लंबाई कितनी है?
एस्केप सुरंग-1 की पूरी लंबाई 10.847 किलोमीटर है। इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
Q. यह सुरंग देश में किस स्थान पर है?
यह भारत की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग बन गई है। देश की सबसे लंबी सुरंग की लंबाई 12.895 किमी है।
Q. परियोजना में आगे क्या काम होना है?
रेलवे के अनुसार, बचे हुए 5 ब्रेकथ्रू अगले एक वर्ष में पूरे होने की उम्मीद है।
Q. सुरंग निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
निर्माण के दौरान चट्टानों में दरारें, खिसकाव, टूट-फूट और जटिल भूगर्भीय क्षेत्र मिले। मेन बाउंड्री थ्रस्ट के पास माइलोनाइट जोन भी पाए गए।
Q. परियोजना के लिए कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं?
परियोजना को गति देने के लिए करीब एक हजार कर्मचारी 24 घंटे काम कर रहे हैं।








