कोटद्वार की मालगोदाम रोड स्थित दुकान के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मनोज कुमार द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने अमरदीप शर्मा को दुकान का वैध मालिक माना और वहां काबिज बलराम भाटिया तथा तिलकराज भाटिया को बेदखल करने का आदेश दिया।
अदालत ने दोनों प्रतिवादियों को फैसला सुनाए जाने की तिथि से एक माह के भीतर दुकान से अपना सामान हटाने को कहा है। इसके बाद उन्हें दुकान का शांतिपूर्वक कब्जा अमरदीप शर्मा को सौंपना होगा। आदेश का पालन नहीं होने पर वादी न्यायालय की प्रक्रिया के जरिए दुकान का कब्जा प्राप्त कर सकेगा।
अदालत में क्या हुआ
मामले के अनुसार, अमरदीप शर्मा ने वर्ष 2012 में मालगोदाम रोड स्थित विवादित संपत्ति को जिलाधिकारी पौड़ी से फ्रीहोल्ड कराया था। उनका कहना था कि दुकान की देखभाल के लिए उन्होंने बलराम भाटिया और तिलकराज भाटिया को जिम्मेदारी दी थी। बाद में दोनों ने दुकान पर कब्जा कर लिया।
दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने अदालत में दावा किया कि अमरदीप शर्मा ने 13 फरवरी 1996 को दुकान महेंद्र कुमार ओबराय को बेच दी थी। उनका कहना था कि महेंद्र कुमार ओबराय ने 16 मार्च 2012 को पंजीकृत बैनामे के जरिए दुकान उन्हें बेच दी थी।
अदालत ने पाया कि प्रतिवादी अपने दावे के समर्थन में बिक्री विलेख पेश नहीं कर सके। उनके पक्ष में कोई मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने फ्रीहोल्ड दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों के आधार पर अमरदीप शर्मा को संपत्ति का वैध स्वामी माना।
कब्जे और पुराने मुकदमे पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने यह भी माना कि दुकान पर प्रतिवादियों का कब्जा है। इसी आधार पर दोनों को दुकान खाली कर कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने वादी के पक्ष में आदेशात्मक डिक्री पारित की और मुकदमे का खर्च भी प्रतिवादियों से दिलाने के निर्देश दिए।
इसी संपत्ति को लेकर वर्ष 2017 में भी एक वाद दायर किया गया था। उस मामले में अदालत ने बलराम भाटिया और तिलकराज भाटिया को दुकान का मालिक नहीं माना था। हालांकि, उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाए बिना बेदखल करने से रोक दिया गया था।
आदेश का सीधा असर
नए फैसले के बाद बलराम भाटिया और तिलकराज भाटिया को एक माह के भीतर दुकान खाली करनी होगी। यदि वे तय अवधि में कब्जा नहीं सौंपते हैं, तो अमरदीप शर्मा न्यायालय के माध्यम से कब्जा लेने की कार्रवाई कर सकते हैं।
निष्कर्ष
कोटद्वार की मालगोदाम रोड स्थित दुकान के मालिकाना हक में अदालत ने अमरदीप शर्मा के पक्ष में फैसला दिया है। भाटिया बंधुओं को एक माह में सामान हटाकर कब्जा सौंपने का आदेश मिला है, जबकि पालन नहीं होने पर न्यायालय की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. अदालत ने दुकान का मालिक किसे माना?
अदालत ने अमरदीप शर्मा को दुकान और संपत्ति का वैध स्वामी माना है।
Q. दुकान किस स्थान पर स्थित है?
विवादित दुकान कोटद्वार की मालगोदाम रोड पर स्थित है।
Q. दुकान खाली करने के लिए कितना समय दिया गया है?
बलराम भाटिया और तिलकराज भाटिया को फैसला सुनाए जाने की तिथि से एक माह का समय दिया गया है।
Q. कब्जा नहीं सौंपने पर क्या होगा?
अमरदीप शर्मा न्यायालय की प्रक्रिया के जरिए दुकान का कब्जा प्राप्त कर सकेंगे।
Q. प्रतिवादियों ने दुकान पर अपना दावा किस आधार पर किया था?
उन्होंने कहा था कि दुकान पहले महेंद्र कुमार ओबराय को बेची गई थी और बाद में पंजीकृत बैनामे के जरिए उन्हें मिली।
Q. अदालत ने प्रतिवादियों के दावे को क्यों नहीं माना?
अदालत के अनुसार, प्रतिवादी बिक्री विलेख या अपने दावे के समर्थन में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सके।









