खटीमा में चल रहे 3 दिवसीय उत्तराखण्ड आदि रंगोत्सव में जनजातीय शिक्षा और विकास को लेकर कई अहम घोषणाएं हुईं। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने बताया कि खटीमा के एकलव्य विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं पर भारत सरकार लगभग ₹10 करोड़ खर्च करेगी।
मंत्री के अनुसार, विद्यालय में करीब ₹4 करोड़ की लागत से हॉस्टल बनाया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण जल्द शुरू होने की बात कही गई। स्कूल में 240 बालकों और 240 बालिकाओं समेत कुल 480 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता होगी।
एकलव्य विद्यालय को लेकर क्या कहा गया
जुएल ओराम ने खटीमा के एकलव्य विद्यालय के शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाजपुर, चकराता और देहरादून के कालसी क्षेत्र में भी ऐसे विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों के साझा प्रयासों से खटीमा में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल का निर्माण संभव हो पाया। क्षेत्र की जनजातीय समस्याओं के प्राथमिकता से समाधान का भरोसा भी दिया गया।
जनसभा में जुएल ओराम ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को याद किया। उन्होंने कहा कि 1999 में वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जनजातीय मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया था। भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय भी इसी वर्ष गठित हुआ।
उनके मुताबिक, मंत्रालय बनाने का उद्देश्य थारू, बोक्सा और जौनसारी समेत अलग-अलग जनजातीय समुदायों के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जनजातीय कल्याण योजनाओं का भी उल्लेख किया।
जनजातीय पहचान और योजनाओं पर जोर
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखण्ड की जनजातीय विविधता और सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी समुदाय राज्य की पहचान को अपनी विशिष्ट परंपराओं से समृद्ध करते हैं।
रिजिजू ने कहा कि 2014 के बाद जनजातीय समाज के कल्याण और उसकी पहचान को नई प्राथमिकता मिली। स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के योगदान को सम्मान देने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत की गई।
उन्होंने पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के जरिए दूरदराज के जनजातीय इलाकों तक विकास पहुंचाने के प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही, सभी समुदायों से अपनी संस्कृति, पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने की अपील की। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की भागीदारी पर भी जोर दिया गया।
कई राज्यों के कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां
आदि रंगोत्सव में उत्तराखण्ड के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश से जनजातीय प्रतिनिधि और कलाकार पहुंचे।
कलाकारों ने लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला की प्रस्तुतियां दीं। रंग-बिरंगी वेशभूषा और लोक कार्यक्रम दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
रिजिजू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं, सुरंग दुर्घटनाओं, भूस्खलन और अन्य मुश्किल परिस्थितियों के दौरान चुनौतियों का सामना करने के लिए धामी की सराहना की।
निष्कर्ष
खटीमा आदि रंगोत्सव में जनजातीय शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास योजनाओं पर केंद्रित संदेश दिया गया। एकलव्य विद्यालय के विस्तार और प्रस्तावित हॉस्टल से क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. खटीमा के एकलव्य विद्यालय के लिए कितनी राशि खर्च होगी?
भारत सरकार विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं पर लगभग ₹10 करोड़ खर्च करेगी।
Q. हॉस्टल की लागत कितनी बताई गई है?
हॉस्टल करीब ₹4 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। इसका टेंडर पूरा हो चुका है।
Q. एकलव्य विद्यालय में कितने विद्यार्थी पढ़ सकेंगे?
विद्यालय में 240 बालकों और 240 बालिकाओं सहित कुल 480 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता होगी।
Q. आदि रंगोत्सव में किन राज्यों के कलाकार पहुंचे?
राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखण्ड, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश से कलाकार आए।
Q. जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन कब हुआ था?
भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय वर्ष 1999 में गठित हुआ था।













