खटीमा में आयोजित 3 दिवसीय आदि रंगोत्सव का समापन हो गया। आयोजन में देश के 15 से अधिक राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों, शिल्पकारों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। समारोह में अलग-अलग जनजातीय संस्कृतियों, लोककलाओं और परंपराओं की प्रस्तुति देखने को मिली।

पुष्कर धामी ने आयोजन के समापन पर कलाकारों, शिल्पकारों और प्रतिभागियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी की सहभागिता से उत्तराखंड की धरती पर देश की विविध जनजातीय परंपराओं का एक मंच पर संगम देखने को मिला।

कलाकारों और शिल्पकारों को मिला मंच

आदि रंगोत्सव के जरिए लोगों को जनजातीय विरासत को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला। आयोजन ने कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा, लोककला और परंपराओं को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का मौका दिया।

इस आयोजन में जनजातीय संस्कृति से जुड़े विविध रूप सामने आए। अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर की सांस्कृतिक भागीदारी दी।

जनजातीय विरासत के संरक्षण पर जोर

पुष्कर धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान, सशक्तीकरण और संस्कृति-परंपराओं के संरक्षण के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, आदि रंगोत्सव इसी संकल्प को आगे बढ़ाने वाला प्रयास है।

स्थानीय स्तर पर आयोजन का महत्व

खटीमा में हुए इस आयोजन से उत्तराखंड में देश की अलग-अलग जनजातीय परंपराओं को एक साथ देखने का अवसर मिला। इससे जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी सांस्कृतिक पहचान व्यापक दर्शक समूह तक पहुंचाने का मंच मिला।

निष्कर्ष

खटीमा का 3 दिवसीय आदि रंगोत्सव 15 से अधिक राज्यों के जनजातीय कलाकारों, शिल्पकारों और प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने जनजातीय संस्कृति, लोककला और परंपराओं को साझा मंच देने के साथ उनके संरक्षण और सशक्तीकरण के प्रयासों को सामने रखा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. आदि रंगोत्सव कहां आयोजित हुआ?

खटीमा में 3 दिवसीय आदि रंगोत्सव आयोजित किया गया।

Q. आदि रंगोत्सव कितने दिन चला?

यह आयोजन 3 दिवसीय था।

Q. कार्यक्रम में कितने राज्यों के प्रतिभागी शामिल हुए?

कार्यक्रम में 15 से अधिक राज्यों से जनजातीय कलाकार, शिल्पकार और प्रतिभागी आए।

Q. आयोजन में क्या प्रस्तुत किया गया?

आयोजन में जनजातीय संस्कृतियों, लोककलाओं और परंपराओं का प्रदर्शन हुआ।

Q. आदि रंगोत्सव से कलाकारों और शिल्पकारों को क्या मिला?

उन्हें अपनी प्रतिभा और परंपराओं को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

Q. आयोजन का व्यापक उद्देश्य क्या बताया गया?

इसे जनजातीय विरासत को समझने और संस्कृति-परंपराओं के संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने वाला आयोजन बताया गया।