काशीपुर में डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन का कहना है कि इसका सीधा असर रिटेलर, थोक कारोबारी और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने वाले अन्य व्यापारियों पर पड़ेगा।

रविवार को हुई बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग रखी। कुमाऊं प्रभारी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने कहा कि 15 अक्तूबर से डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की बात सामने आई है। संगठन इस व्यवस्था का विरोध करता है।

उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में व्यापारी रोजमर्रा के कारोबार में डिजिटल माध्यमों से भुगतान करते हैं। ऐसे समय में डिस्ट्रीब्यूटर्स बाजार पहले से मंदी, ऑनलाइन कारोबार और कम मार्जिन जैसी चुनौतियों से गुजर रहा है। एसोसिएशन के अनुसार नया शुल्क व्यापार की लागत बढ़ा सकता है।

व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ की चिंता

संगठन के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि रिटेलर और थोक व्यापारी दोनों डिजिटल भुगतान करते हैं। इसलिए प्रस्तावित शुल्क का असर कारोबार की अलग-अलग कड़ियों पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव की समीक्षा करने को कहा।

प्रदेश मीडिया प्रभारी शुभम सिंघल ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें डिजिटल लेनदेन का अतिरिक्त खर्च व्यापारियों पर न आए। बैठक में अमित जैन, मुकेश अग्रवाल, रचित अग्रवाल, सचिन सिंघल, सचिन अग्रवाल, आशुतोष शर्मा, विजय अग्रवाल, संजीव अग्रवाल और आशीष टंडन मौजूद रहे।

निष्कर्ष

डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने 0.4 प्रतिशत शुल्क के प्रस्ताव को व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। संगठन ने सरकार से यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की योजना पर फिर से विचार करने की मांग की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. डिजिटल लेनदेन पर कितना शुल्क प्रस्तावित है?

प्रस्तावित शुल्क 0.4 प्रतिशत है।

Q. शुल्क कब से लगाए जाने की बात कही गई है?

अरविंद गुप्ता के अनुसार, 15 अक्तूबर से शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था है।

Q. प्रस्ताव का विरोध किस संगठन ने किया है?

काशीपुर डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने इसका विरोध किया है।

Q. एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की है?

संगठन ने डिजिटल और यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

Q. व्यापारियों को इस शुल्क से क्या परेशानी है?

एसोसिएशन का कहना है कि मंदी, ऑनलाइन कारोबार और कम मार्जिन के बीच अतिरिक्त शुल्क उठाना मुश्किल होगा।