नैनीताल के कृष्णापुर क्षेत्र के लिए मोटर मार्ग की मांग कर रहे लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शनिवार को बलियानाले के निरीक्षण के बाद भू-वैज्ञानिकों ने यहां सड़क निर्माण की संभावनाओं को चुनौतीपूर्ण बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, बलियानाले की कच्ची चट्टानें वाहनों का भार और कंपन सहन करने के लिए सक्षम नहीं हैं।
विशेषज्ञों ने चेताया कि इन चट्टानों में दोबारा दरारें आईं तो खतरा बढ़ सकता है। इससे सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ेंगी और रखरखाव का काम भी मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण के दौरान कृष्णापुर के लोगों ने आपातकालीन स्थिति, विद्यार्थियों, गर्भवतियों और बुजुर्गों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया।
यह निरीक्षण एनएचपीसी यूटेक के चीफ और वर्तमान में बलियानाला में भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञ की जिम्मेदारी संभाल रहे भाष्कर पाटनी तथा जियोटेक्निकल इंजीनियर भावेश पांडे ने किया। उनके साथ सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। क्षेत्रवासियों ने विशेषज्ञों के सामने कृष्णापुर के लिए सड़क सुविधा की जरूरत रखी।
वैकल्पिक मार्ग पर हो रहा विचार
क्षेत्र के लोगों को सड़क सुविधा देने के लिए सिपाहीधारा के पार से वैकल्पिक मार्ग की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले विशेषज्ञों का दोबारा सर्वे, तकनीकी मंजूरी और वित्तीय स्वीकृति जरूरी होगी। इनके बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने माना कि कृष्णापुर के लोगों के लिए सड़क सुविधा का अभाव बड़ी समस्या है और मोटर मार्ग की मांग जायज है। इससे यह स्पष्ट है कि जरूरत को स्वीकार किया गया है, लेकिन बलियानाले की भूगर्भीय स्थिति सीधे सड़क निर्माण में बड़ी बाधा बन रही है।
बलियानाला क्षेत्र में सुरक्षा कार्य शुरू होने से पहले किए गए सर्वे में आईआईटी रुड़की समेत विषय विशेषज्ञों ने चट्टानों को फ्रेक्चर बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि ये चट्टानें मिट्टी में परिवर्तित हो चुकी हैं। इसी चुनौती को देखते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में केबल एंकरिंग, रॉक एंकरिंग, पाइलिंग, एसडीए समेत अन्य उपचार शामिल किए गए।
20 दिनों से जारी है आंदोलन
कृष्णापुर के लिए मोटर मार्ग की मांग कर रहे लोग बीते 20 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। शनिवार को तल्लीताल डांठ पर उनका धरना प्रदर्शन जारी रहा। पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने कहा कि भू-वैज्ञानिकों के सर्वे और क्षेत्रवासियों से मिली जानकारी के बाद मार्ग की संभावनाएं नजर नहीं आतीं।
उन्होंने बताया कि आपसी रायशुमारी के बाद आंदोलन को तेज करने पर फैसला लिया जाएगा। इसके तहत मशाल जुलूस और बलियानाला कार्यक्षेत्र में आंदोलन की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
भूस्खलन रोकने के लिए पानी का बहाव नियंत्रित करने की जरूरत
बलियानाला में सुरक्षा कार्यों के बावजूद भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी क्षेत्रों में हुए भूस्खलन ने सुरक्षा उपायों की जरूरत फिर सामने ला दी। क्षेत्र में भू-कटाव रोकने के लिए पानी को वीरभट्टी पुल तक चैनलाइज करने की जरूरत बताई जा रही है।
बलियानाला शहर का संवेदनशील क्षेत्र रहा है। करीब 1980 के दशक में आवासीय बसावट बढ़ने के बाद यहां जोखिम और बढ़ा। इसी क्षेत्र में रईस होटल भूस्खलन की चपेट में आ चुका है। बीते दशक के भूस्खलनों से जीआईसी, हरिनगर, सिपाहीधारा और कृष्णापुर पर भी खतरा बढ़ा था।
बलियानाला में सुरक्षा कार्यों पर करीब 3 सौ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे कुछ इलाकों को सुरक्षा मिली, लेकिन इस बरसात में टूटा पहाड़, कैलाखान और दुर्गापुर नर्सरी में हुए भूस्खलन ने चिंता दोबारा बढ़ा दी। इसी कारण यूएलएमसी की टीम ने भी हाल में क्षेत्र का दौरा किया था।
1974 में भी दिया गया था चैनलाइजेशन का सुझाव
पूर्व पालिका उपाध्यक्ष डीएन भट्ट के अनुसार, वर्ष 1974 में हाईपावर समिति ने तल्लीताल डांठ से हरिनगर तक बने 22 फॉल के आगे वीरभट्टी तक 2.2 किलोमीटर फॉल बनाने का सुझाव दिया था। इसका उद्देश्य पानी के बहाव को नियंत्रित करना था।
पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने भी कहा कि पानी को चैनलाइज करके ही भू-कटाव को रोका जा सकता है। उन्होंने बलियानाला सुरक्षा कार्य में पानी के फॉल की व्यवस्था पर सवाल उठाए।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता प्रमोद पाठक के अनुसार, बलियानाला सुरक्षा कार्य तक पानी के बहाव को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसके आगे वीरभट्टी तक करीब एक किलोमीटर क्षेत्र अभी बाकी है। वहां फॉल और सुरक्षा कार्य विषय विशेषज्ञों की राय तथा उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद ही किए जा सकेंगे।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों ने कृष्णापुर के लिए सड़क की जरूरत को जायज माना है, लेकिन बलियानाले की कमजोर और फ्रेक्चर चट्टानों के कारण सीधा मार्ग चुनौतीपूर्ण बताया है। फिलहाल वैकल्पिक मार्ग, दोबारा सर्वे और जरूरी मंजूरियों के बाद ही आगे की दिशा तय होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कृष्णापुर के लिए मोटर मार्ग की मांग क्यों की जा रही है?
कृष्णापुर के लोगों ने आपातकालीन स्थिति के साथ विद्यार्थियों, गर्भवतियों और बुजुर्गों की समस्याओं को देखते हुए सड़क सुविधा की मांग की है।
Q. बलियानाले में सड़क निर्माण को चुनौतीपूर्ण क्यों बताया गया?
विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की कच्ची और फ्रेक्चर चट्टानें वाहनों का भार और कंपन सहने में सक्षम नहीं हैं।
Q. कृष्णापुर के लिए किस विकल्प पर विचार हो रहा है?
सिपाहीधारा के पार से वैकल्पिक मार्ग की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
Q. वैकल्पिक मार्ग पर आगे की कार्रवाई कब होगी?
विशेषज्ञों के दोबारा सर्वे, तकनीकी मंजूरी और वित्तीय स्वीकृति के बाद आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
Q. कृष्णापुर के लोग कितने समय से आंदोलन कर रहे हैं?
मोटर मार्ग की मांग को लेकर उनका आंदोलन बीते 20 दिनों से जारी है।
Q. बलियानाला में भूकटाव रोकने के लिए क्या सुझाव दिया गया है?
पानी के बहाव को वीरभट्टी पुल तक चैनलाइज करने की जरूरत बताई गई है।









