चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में पुलिस और विभागीय टीम ने करीब 70 नाली जमीन पर उगाई जा रही अवैध भांग नष्ट कर दी। यह कार्रवाई ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के तहत रामपुर तोक में की गई। अभियान का मकसद नशीली फसलों पर रोक लगाना और ग्रामीणों को इसके कानूनी खतरे समझाना है।
कार्रवाई में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), देवाल पुलिस चौकी, समाज कल्याण विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और वन विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। टीम ने ग्रामीणों से आसपास अपने आप उग रही जंगली भांग को भी हटाने को कहा।
ग्रामीणों को नशे के नुकसान और अवैध कैनबिस की खेती से जुड़े कानूनी परिणामों की जानकारी दी गई। SOG प्रभारी SI Satendra Butola ने साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों को लेकर भी चेताया। इनमें फर्जी KYC, ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखा, डिजिटल अरेस्ट और संदिग्ध लिंक शामिल हैं। ऐसे मामलों की शिकायत 1930 पर करने की अपील की गई।
पहाड़ों में खेती और आमदनी का सवाल
अवैध फसल हटाने की कार्रवाई के साथ पहाड़ी इलाकों में रोजगार और खेती से जुड़ा बड़ा सवाल भी सामने आता है। बंदर और जंगली सूअर जैसे जानवरों से फसलों को लगातार नुकसान होने के कारण कई परिवारों ने खेती छोड़ दी है। कई सीढ़ीदार खेत अब खाली पड़े हैं।
किसानों के बीच यह धारणा है कि जंगली जानवर भांग की फसल को दूसरी फसलों की तरह नुकसान नहीं पहुंचाते। इसी वजह से नशीली भांग की जगह नियंत्रित और कानूनी औद्योगिक हेम्प को संभावित विकल्प के रूप में देखा जाता है।
औद्योगिक हेम्प में नशीले तत्व की मात्रा कम होती है और इसे ड्रग के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके रेशे से कपड़ा और रस्सी बनाई जा सकती है। बीज का तेल, निर्माण सामग्री और दवाओं से जुड़े इस्तेमाल भी इसके बताए गए उपयोगों में शामिल हैं।
उत्तराखंड में पहल, लेकिन बाजार की कमी
उत्तराखंड भारत का पहला राज्य था जिसने औद्योगिक हेम्प की खेती को कानूनी मंजूरी दी थी। हालांकि, इसके बाद इस क्षेत्र के लिए मजबूत बाजार और काम करने वाले नियम विकसित नहीं हो सके। इसी कारण औद्योगिक हेम्प की खेती राज्य में बड़े स्तर पर आगे नहीं बढ़ पाई।
हिमाचल प्रदेश अब जंगली भांग की जगह राज्य से लाइसेंस प्राप्त औद्योगिक हेम्प को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। वहां खेती के लिए 0.3% THC की सीमा रखी जा रही है। क्षेत्र के बड़े स्तर पर विकसित होने के बाद हिमाचल को सालाना $120 to $240 million की आय की उम्मीद है।
चमोली की कार्रवाई यह साफ करती है कि अवैध नशीली खेती पर रोक जरूरी है। साथ ही, पहाड़ों में खाली होती जमीन और घटती कृषि आय के बीच कानूनी हेम्प के लिए लाइसेंस, बीज, खरीदार और तकनीकी मदद जैसी व्यवस्था पर भी विचार की जरूरत दिखाई देती है।
निष्कर्ष
रामपुर तोक में 70 नाली अवैध भांग नष्ट की गई और ग्रामीणों को नशे तथा साइबर ठगी से बचाव की जानकारी दी गई। औद्योगिक हेम्प के लिए स्पष्ट नियम और बाजार मिलें, तो यह पहाड़ी इलाकों में आय के विकल्प से जुड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. चमोली में कितनी जमीन पर अवैध भांग नष्ट की गई?
करीब 70 नाली जमीन पर उगाई गई अवैध भांग नष्ट की गई।
Q. कार्रवाई चमोली के किस इलाके में हुई?
कार्रवाई देवाल क्षेत्र के रामपुर तोक में हुई।
Q. अभियान में कौन-कौन से विभाग शामिल थे?
SOG, देवाल पुलिस चौकी, समाज कल्याण विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और वन विभाग की टीम इसमें शामिल रही।
Q. ग्रामीणों को किन बातों की जानकारी दी गई?
उन्हें अवैध भांग की खेती के कानूनी परिणाम और नशे से होने वाले नुकसान बताए गए। आसपास उग रही जंगली भांग हटाने को भी कहा गया।
Q. साइबर ठगी की शिकायत किस नंबर पर की जा सकती है?
फर्जी KYC, ऑनलाइन निवेश ठगी, डिजिटल अरेस्ट या संदिग्ध लिंक से जुड़े मामलों की शिकायत 1930 पर की जा सकती है।
Q. औद्योगिक हेम्प का इस्तेमाल किन कामों में होता है?
इससे रेशा, कपड़ा, रस्सी, बीज का तेल, निर्माण सामग्री और दवाओं से जुड़ी सामग्री बनाई जा सकती है।
Q. उत्तराखंड में औद्योगिक हेम्प को लेकर क्या स्थिति है?
उत्तराखंड भारत का पहला राज्य था जिसने इसकी खेती को कानूनी मंजूरी दी। बाद में बाजार और प्रभावी नियमों की कमी के कारण यह क्षेत्र बड़े स्तर पर विकसित नहीं हो सका।
Q. हिमाचल प्रदेश औद्योगिक हेम्प के लिए कौन-सी सीमा रख रहा है?
हिमाचल प्रदेश राज्य लाइसेंस वाली खेती में 0.3% THC की सीमा के तहत औद्योगिक हेम्प को बढ़ावा दे रहा है।












