चमोली जिले में भालुओं के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने और मवेशियों पर हमला करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई जगह भालू गौशालाओं को तोड़कर अंदर बंधे मवेशियों को मार रहा है। इस बदलाव ने ग्रामीणों के साथ वन विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है।
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष भालू के हमलों में 40 मवेशियों की मौत हुई थी। इससे पहले के वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या 5 से 10 के बीच रही थी। इस वर्ष अब तक करीब 15 मवेशियों को भालू अपना निवाला बना चुका है।
पोखरी में सबसे ज्यादा घटनाएं
जिले के ज्योतिर्मठ, पोखरी और दशोली क्षेत्रों में भालू की सक्रियता अधिक बताई जा रही है। इनमें पोखरी ब्लॉक में मवेशियों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। चंद्रशिला पट्टी के बंगथल, डुंगर, कांडई चंद्रशिला, जौरासी, भिकोना और किमोठा गांवों में गौशालाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले बताए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, भालू गौशालाओं में घुसकर मवेशियों पर हमला कर रहा है। कई घटनाओं में मारे गए मवेशियों के कूबड़ और थन खाने की बात भी सामने आई है। इससे गांवों में डर का माहौल बना हुआ है और आबादी वाले क्षेत्रों में भालू की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ी है।
वन विभाग व्यवहार का अध्ययन करेगा
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन ने बताया कि भालू सर्वाहारी जीव है। उसके भोजन में फल, जड़ें, घास, कीड़े-मकोड़े, छोटे स्तनधारी और मांस शामिल होते हैं। विभाग को आशंका है कि मवेशियों पर हमलों की बढ़ती घटनाएं भालू के व्यवहार में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं।
डीएफओ के अनुसार, पोखरी और ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भालू की सक्रियता ज्यादा है। विभाग अब उसके व्यवहार का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही रेडियो कॉलर की मदद से भालू की निगरानी करने की योजना है। इस कदम का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में उसकी गतिविधियों पर नजर रखना है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं गंभीर घटनाएं
पोखरी ब्लॉक के नेल गांव के सिदेली तोक में 3 सितंबर को जंगल में घास लेने गई 2 महिलाएं भालू से बचने की कोशिश में खाई में गिर गई थीं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह घटना ग्रामीणों के लिए भालू की मौजूदगी से जुड़े खतरे का गंभीर उदाहरण बनी।
दिसंबर 2025 में भालू राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिशंकर में भी घुस गया था। उस घटना में 2 छात्र घायल हुए थे। इसके बाद केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने प्रभावित क्षेत्र में भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उसकी दहशत कम नहीं हुई।
मवेशियों पर बढ़ते हमलों और आबादी के पास भालू की सक्रियता ने वन विभाग के सामने निगरानी और अध्ययन की जरूरत बढ़ा दी है। विभाग की अगली कार्रवाई रेडियो कॉलर के जरिए भालू की गतिविधियों पर नजर रखने और उसके व्यवहार को समझने पर केंद्रित होगी।
निष्कर्ष
चमोली में भालू के हमलों का असर अब जंगल तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष 40 और इस वर्ष अब तक करीब 15 मवेशियों की मौत के बाद पोखरी, ज्योतिर्मठ और दशोली में चिंता बढ़ी है। वन विभाग भालू के व्यवहार का अध्ययन कर रेडियो कॉलर से निगरानी करने की तैयारी में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. चमोली में भालू के हमले किस पर बढ़े हैं?
भालू आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचकर मवेशियों पर हमला कर रहा है। कई जगह वह गौशालाएं तोड़कर अंदर बंधे मवेशियों तक पहुंच रहा है।
Q. पिछले वर्ष भालू के हमलों में कितने मवेशी मारे गए?
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 40 मवेशियों की मौत हुई थी।
Q. इस वर्ष अब तक कितने मवेशी मारे गए हैं?
इस वर्ष अब तक करीब 15 मवेशियों को भालू अपना निवाला बना चुका है।
Q. चमोली के किन क्षेत्रों में भालू की सक्रियता अधिक है?
ज्योतिर्मठ, पोखरी और दशोली क्षेत्रों में भालू की सक्रियता अधिक बताई गई है। पोखरी ब्लॉक में घटनाएं ज्यादा सामने आ रही हैं।
Q. पोखरी ब्लॉक के किन गांवों में घटनाएं सामने आई हैं?
बंगथल, डुंगर, कांडई चंद्रशिला, जौरासी, भिकोना और किमोठा गांवों में गौशालाओं पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
Q. वन विभाग भालू पर नजर रखने के लिए क्या करेगा?
वन विभाग भालू के व्यवहार का अध्ययन करेगा और रेडियो कॉलर की मदद से उसकी निगरानी करने की योजना है।
Q. क्या पहले भी भालू के हमलों में लोगों की मौत हुई है?
3 सितंबर को नेल गांव के सिदेली तोक में भालू से बचते समय खाई में गिरने से 2 महिलाओं की मौत हुई थी।










