बागेश्वर जिले के कांडा क्षेत्र में बनेगांव के जंगल से 81 वर्षीय मोहन राम का शव बरामद हुआ है। वह 17 सितंबर की शाम से लापता थे। शव एक गधेरे में मिला, जिसके बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
मोहन राम भेटा गांव के रहने वाले थे। इन दिनों वह बनेगांव में अपनी बेटी मीरा देवी के घर रह रहे थे। 17 सितंबर को वह बिना बताए घर से निकल गए थे। काफी तलाश के बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर परिवार ने 21 सितंबर को कांडा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
परिजनों ने जताई तेंदुए के हमले की आशंका
शव मिलने की सूचना के बाद दिल्ली में नौकरी करने वाले उनके बेटे जगदीश राम और दीवान राम मौके पर पहुंचे। बेटी समेत परिजनों ने मौत के पीछे तेंदुए के हमले की आशंका जताई है। हालांकि, यह अभी परिवार का संदेह है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
धरमघर के रेंजर विक्रम कैड़ा ने बताया कि शव का रंग नीला पड़ा हुआ था। शुरुआती जांच में तेंदुए के हमले के स्पष्ट निशान नहीं मिले। उन्होंने कहा कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही
शव बरामद होने के बाद पुलिस ने पंचनामा भरा और उसे जिला अस्पताल भेजा। सीओ मनीष शर्मा के अनुसार, परिजनों की आशंका समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोहन राम की मौत किस वजह से हुई।
निष्कर्ष
बनेगांव के जंगल में मिले मोहन राम के शव की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामले की स्थिति साफ होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. मोहन राम की उम्र कितनी थी?
मोहन राम 81 वर्षीय बुजुर्ग थे।
Q. वह कब से लापता थे?
वह 17 सितंबर की शाम घर से निकलने के बाद लापता थे।
Q. उनके लापता होने की शिकायत कब दर्ज हुई?
परिवार ने 21 सितंबर को कांडा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
Q. शव कहां मिला?
शव कांडा क्षेत्र के बनेगांव जंगल में एक गधेरे से बरामद हुआ।
Q. क्या तेंदुए के हमले की पुष्टि हुई है?
नहीं। परिजनों ने ऐसी आशंका जताई है, लेकिन शुरुआती जांच में हमले के स्पष्ट निशान नहीं मिले।
Q. मौत का कारण कब स्पष्ट होगा?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।









