काशीपुर, उत्तराखंड में एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई जारी है। अब तक करीब 20–25 दिनों के काम में शुंग-कुषाण काल की एक छोटी ईंट और ऊपरी स्तर पर गोलाकार ईंटों की संरचना मिली है। बारिश के कारण खुदाई में कुछ रुकावटें भी आईं।
एएसआई देहरादून सर्किल के प्रभारी अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि गोलाकार संरचना को फिलहाल प्रारंभिक चरण में कुएं के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसके बारे में अंतिम जानकारी पूरी संरचना सामने आने के बाद ही दी जा सकेगी।
खुदाई से क्या जानकारी मिली
डॉ. जोशी के अनुसार, खुदाई आगे बढ़ने के साथ टीम इस संरचना की मूल नींव का स्तर तलाश रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि वहां कितने स्तर मौजूद थे और क्या अलग-अलग चरणों में ईंटों से बनी संरचनाओं का इस्तेमाल हुआ था। यदि यह ईंटों का कुआं साबित होता है, तो उसकी शुरुआत का पता नीचे की परतों तक खुदाई करके लगाने की कोशिश की जाएगी।
एएसआई अधिकारी ने बताया कि यह स्थल बहुत प्राचीन है और इसका इतिहास करीब 2,000 वर्षों तक फैला हुआ माना जाता है। यहां पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) के प्रमाण मिलने की बात भी सामने आई है। इसी आधार पर कई विद्वान इस स्थल को महाभारत काल से जोड़ते हैं। यह संबंध विद्वानों की व्याख्या के रूप में बताया गया है, स्थल की अंतिम प्रमाणित पहचान के रूप में नहीं।
पहले भी हो चुकी है खुदाई
डॉ. जोशी के मुताबिक, वाईडी शर्मा ने 1965 में यहां औपचारिक खुदाई की थी। उस दौरान कई संरचनाएं सामने आई थीं। इसके बाद 1970–71 में फिर खुदाई की गई, जिसमें कुछ अन्य संरचनाओं की पहचान हुई। मौजूदा अभियान का लक्ष्य पुराने निष्कर्षों को आगे बढ़ाते हुए स्थल का पूरा सांस्कृतिक क्रम समझना है।
टीम अब प्राकृतिक मिट्टी तक व्यवस्थित खुदाई करना चाहती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि स्थल पर मानव गतिविधि और निर्माण की शुरुआत कब हुई थी। साथ ही, अलग-अलग परतों में मिले अवशेषों के आधार पर इसके विकास के क्रम का अध्ययन किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
काशीपुर के इस प्राचीन स्थल पर शुरुआती खुदाई में शुंग-कुषाण काल की ईंट और गोलाकार ईंटों की संरचना मिली है। एएसआई अब गहरी और व्यवस्थित खुदाई के जरिए इसकी नींव, निर्माण के चरण और पूरी सांस्कृतिक परत को समझने की कोशिश कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. काशीपुर में खुदाई के दौरान क्या मिला है?
शुंग-कुषाण काल की एक छोटी ईंट और ऊपरी स्तर पर गोलाकार ईंटों की संरचना मिली है।
Q. गोलाकार संरचना को अभी क्या माना जा रहा है?
इसे प्रारंभिक तौर पर गोलाकार कुआं माना जा रहा है। इसकी पुष्टि पूरी संरचना सामने आने के बाद होगी।
Q. अब तक कितने दिनों की खुदाई हुई है?
अब तक करीब 20–25 दिनों तक खुदाई हुई है। बारिश के कारण काम में कुछ रुकावटें आईं।
Q. इस स्थल का इतिहास कितना पुराना बताया गया है?
एएसआई अधिकारी के अनुसार, स्थल का इतिहास करीब 2,000 वर्षों तक फैला हुआ माना जाता है।
Q. इस स्थल को महाभारत काल से क्यों जोड़ा जाता है?
यहां पेंटेड ग्रे वेयर के प्रमाण मिलने की बात कही गई है। इसी आधार पर कई विद्वान इसे महाभारत काल से जोड़ते हैं।
Q. इस स्थल पर पहले कब खुदाई हुई थी?
वाईडी शर्मा ने 1965 में औपचारिक खुदाई की थी। इसके बाद 1970–71 में भी खुदाई हुई थी।
Q. मौजूदा खुदाई का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्राकृतिक मिट्टी तक व्यवस्थित खुदाई करके स्थल का पूरा सांस्कृतिक क्रम और इसकी शुरुआत समझना मौजूदा अभियान का मुख्य उद्देश्य है।










