जांच में यूटीईटी प्रथम (2024) के अंकपत्र को कूटरचित पाया गया। मूल सारणियन पंजिका के मिलान से वास्तविक अंक 150 में 54 दर्ज मिले। इन अंकों के आधार पर शिक्षिका परीक्षा में अनुत्तीर्ण थीं।

जांच में क्या सामने आया

रिकॉर्ड के अनुसार नियुक्ति के लिए पेश किए गए प्रमाणपत्र में प्राप्तांक और अर्हता कोड में बदलाव किया गया था। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने स्पष्ट किया कि यह अंकपत्र परिषद से जारी नहीं हुआ।

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बागेश्वर और कपकोट ब्लॉक में पहले भी 9 शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र फर्जी मिल चुके हैं। नए मामले के बाद जिले में अयोग्य घोषित शिक्षकों की कुल संख्या 10 हो गई है।

विभाग ने दिया स्पष्टीकरण का मौका

जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें 11 सितंबर 2026 को मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

समय पर जवाब नहीं देने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली के तहत सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

यूटीईटी सत्यापन में सामने आए इस मामले से बागेश्वर में फर्जी प्रमाणपत्रों पर चल रही जांच का दायरा बढ़ा है। शिक्षिका का अगला कदम उनके लिखित स्पष्टीकरण और मूल दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. बागेश्वर में किस प्रमाणपत्र को फर्जी पाया गया?

राजकीय प्राथमिक विद्यालय ससोला में तैनात सहायक शिक्षिका का यूटीईटी प्रथम (2024) अंकपत्र फर्जी पाया गया।

Q. शिक्षिका के वास्तविक यूटीईटी अंक कितने थे?

मूल रिकॉर्ड में उनके 150 में 54 अंक दर्ज मिले।

Q. शिक्षिका को कब उपस्थित होना है?

उन्हें 11 सितंबर 2026 को मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना है।

Q. जवाब संतोषजनक नहीं होने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

सेवा समाप्त करने की कार्रवाई उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली के तहत की जा सकती है।

Q. बागेश्वर में अब कितने शिक्षक अयोग्य घोषित हो चुके हैं?

इस मामले के बाद जिले में अयोग्य घोषित शिक्षकों की कुल संख्या 10 हो गई है।