बागेश्वर में अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी के कर्मचारियों ने आर्थिक संकट को लेकर आंदोलन का रास्ता चुना है। अल्मोड़ा मैग्नेसाइट वर्कर्स यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और शासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग रखी।

यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों की पीएफ धनराशि करीब 1.35 करोड़ रुपये है, जो अभी तक जमा नहीं हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि इस स्थिति से उनके परिवारों के सामने आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। बच्चों की पढ़ाई, विवाह और दूसरी पारिवारिक जरूरतों पर भी इसका असर पड़ रहा है।

21 सितंबर से शुरू होगा धरना

कंपनी प्रबंधन वर्ग के साथ हुई बातचीत के बाद 18 सितंबर को प्रस्तावित धरना टाल दिया गया था। अब कर्मचारियों ने 21 सितंबर को सुबह 11 बजे से जिलाधिकारी कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का फैसला लिया है।

कर्मचारियों की मांग है कि कंपनी के हालात सुधारने के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बोर्ड की बैठक होने और बैंक ऋण तथा आर्थिक पैकेज मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान गायत्री प्रसाद, शांती लाल, सुरेंद्र लाल, राजेंद्र सिंह, जगदीश प्रसाद, विक्रम सिंह, विमल कुमार और मनोज सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

निष्कर्ष

अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कर्मचारियों ने पीएफ धनराशि जमा न होने और कंपनी की आर्थिक स्थिति को लेकर अनिश्चितकालीन धरने का निर्णय लिया है। अब उनकी नजर शासन के हस्तक्षेप, बोर्ड बैठक और आर्थिक मदद से जुड़े अगले कदम पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. कर्मचारियों ने प्रदर्शन कहां किया?

कर्मचारियों ने बागेश्वर के कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।

Q. कर्मचारियों की मुख्य शिकायत क्या है?

कर्मचारियों का कहना है कि उनकी करीब 1.35 करोड़ रुपये की पीएफ धनराशि अभी तक जमा नहीं हुई है।

Q. अनिश्चितकालीन धरना कब शुरू होगा?

धरना 21 सितंबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगा।

Q. धरना कहां आयोजित किया जाएगा?

अनिश्चितकालीन धरना जिलाधिकारी कार्यालय में होगा।

Q. कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

कर्मचारी बोर्ड की बैठक, बैंक ऋण और आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

Q. 18 सितंबर को प्रस्तावित धरने का क्या हुआ?

कंपनी के प्रबंधक वर्ग के साथ बातचीत के बाद 18 सितंबर का प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया गया था।